बेअंत सिंह हत्याकांड: बलवंत सिंह राजोआना को SC से राहत नहीं, अब गृह मंत्रालय के पाले में गेंद
नई दिल्ली: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. उसने अपनी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दया याचिका दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने सक्षम अथॉरिटी (गृह मंत्रालय) से बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर निर्णय लेने के लिए कहा है.
बलवंत सिंह राजोआना लगभग 27 साल से जेल में बंद है. उसे 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के लिए अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी. उसने 2012 में दया याचिका दाखिल की थी, जो केंद्र सरकार के पास लंबित है. गृह मंत्रालय की ओर से उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने पर कोई फैसला नहीं लिया है.
इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान बलवंत के वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी थी कि दया याचिका को इतने लंबे समय तक पेंडिंग रखना उनके मुवक्किल के मूल अधिकारों का हनन है, लिहाजा कोर्ट को उसकी तत्काल रिहाई का आदेश देना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार का जवाब मांगा था. केंद्र की तरफ से दाखिल हलफनामे में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का हवाला दिया गया था.
पिछली सुनवाई पर मुकुल रोहतगी ने राजोआना की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि बम ब्लास्ट में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की मौत हो गई थी. इस केस में जुलाई 2007 में बलवंत सिंह राजोआना को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट ने 2010 में उसकी सजा को बरकरार रखा था, वह 27 साल से जेल में है और 2012 से उसकी दया याचिका लंबित है.
मुकुल रोहतगी ने शीर्ष अदालत में कहा था, ‘राजोआना की उम्र 56 साल हो गई, जब घटना हुई थी उस समय वह युवा था. हम दया याचिका पर गृह मंत्रालय के फैसले का इंतजार नहीं कर सकते, सुप्रीम कोर्ट को मामले में अब फैसला सुनाना चहिए. यह अमानवीय है, विकल्प के रूप में अगर दया याचिका पर फैसला नहीं होता है, तब तक बलवंत सिंह राजोआना को पैरोल पर छोड़ा जा सकता है. दया याचिका पर फैसले में देरी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही अलग से की जा सकती है.’