लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, तेलंगाना में BJP नेता हाउस अरेस्ट
केंद्र सरकार को संसद में एक महत्वपूर्ण झटका लगा, जब महिलाओं के लिए विधानसभाओं और लोकसभा में एक तिहाई आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में आवश्यक बहुमत नहीं मिल सका. यह विधेयक न केवल महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करता था, बल्कि इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों में भी बड़े पैमाने पर वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया था. शुक्रवार को हुए मतदान में विधेयक के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 230 सांसद इसके विरोध में रहे. हालांकि, संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी कम से कम 352 वोट जरूरी थे, जो सरकार हासिल नहीं कर सकी. विधेयक के तहत लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने का प्रस्ताव था. इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या बढ़ाई जानी थी, ताकि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सके. सरकार का तर्क था कि यह बदलाव 1971 की जनगणना के बाद पहली बार हो रहे परिसीमन के जरिए जनसंख्या में आए बदलावों को प्रतिबिंबित करेगा.
हालांकि, विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध किया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने महिलाओं के नाम पर असंवैधानिक चाल चली है और परिसीमन की प्रक्रिया को आरक्षण से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की है. विपक्ष का कहना था कि वे महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसे परिसीमन और जनगणना से जोड़ना उचित नहीं है. सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में प्रयास जारी रखेगी. गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा कि देश की महिलाएं इस मुद्दे पर विपक्ष को माफ नहीं करेंगी. विधेयक के खारिज होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महिला सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर महिलाओं के अधिकारों को बाधित करने का आरोप लगाया. केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि यह देश की करोड़ों महिलाओं का अपमान है, जो राजनीतिक भागीदारी की उम्मीद लगाए बैठी थीं.
विपक्ष पर हमला