22 साल बाद संसद लौट रहे नीतीश कुमार

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज राज्यसभा के सदस्य के तौर पर शपथ लेकर अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे। गुरुवार को दिल्ली पहुंचने पर उन्होंने यह साफ कर दिया कि अब दिल्ली ही उनका ठिकाना होगा और वो वहीं रहकर काम करेंगे। साथ ही उन्होंने इस बात का संकेत भी दिया कि 3-4 दिन में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। नीतीश कुमार का केंद्रीय राजनीति से जुड़ाव बहुत पुराना है। 1989 में पहली बार सांसद बनने से लेकर 2004 तक उन्होंने दिल्ली के सत्ता के गलियारों में कई महत्वपूर्ण पदों को संभाला।
वीपी सिंह सरकार में पहली बार बने मंत्री
केंद्रीय राजनीति में नीतीश कुमार की यात्रा दिसंबर 1989 में शुरू हुई। बाढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीतने के बाद वे पहली बार लोकसभा में पहुंचे। उनकी क्षमताओं को पहचानते हुए, तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) ने उन्हें कृषि और सहकारिता राज्य मंत्री नियुक्त किया। हालांकि, यह कार्यकाल छोटा रहा और नवंबर 1990 में सरकार गिरने के साथ ही समाप्त हो गया।
अटल सरकार में रेल मंत्री
नीतीश कुमार का कद सही मायने में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान बढ़ा। 1998 में उन्हें रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी दौरान 1999 में पश्चिम बंगाल के गैसल में एक भयानक रेल दुर्घटना हुई। इस त्रासदी की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए, नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राजनीति में नैतिकता का यह उदाहरण आज भी मिसाल के तौर पर पेश किया जाता है।
भूतल परिवहन और कृषि मंत्रालय
वाजपेयी सरकार के कार्यकाल के दौरान नीतीश कुमार ने अलग-अलग समय पर कई अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों की कमान भी संभाली। 1998 और 1999 के बीच उन्होंने भूतल परिवहन मंत्री का अतिरिक्त प्रभार संभाला। इसके बाद नवंबर 1999 से मार्च 2000 तक और फिर मई 2000 से जुलाई 2001 तक उन्होंने देश के कृषि मंत्री के रूप में कार्य किया। इस भूमिका में उन्होंने किसानों के हितों की रक्षा के लिए कई दूरगामी नीतिगत निर्णय लिए।