Bihar Politics: चिराग को साथ लाने की RJD की एक और कवायद, 5 जुलाई को मनाएगी रामविलास पासवान की जयंती

पटना. लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में भतीजे चिराग पासवान (Chirag Paswan) और चाचा पशुपति कुमार पारस (Pashupati Kumar Paras) के बीच की पावर और प्रतिष्‍ठा की लड़ाई जारी है. इस बीच आरजेडी एक बार फिर एलजेपी के युवा नेता को अपने साथ लाने की कवायद में जुट गई है. यही नहीं, अब तक आरजेडी चिराग पासवान को महागठबंधन में लाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अब उनको खुश करने के लिए एक तेजस्‍वी यादव (RJD leader Tejashwi Yadav) ने नई घोषणा कर दी है.

बता दें कि आरजेडी ने 5 जुलाई को चिराग पासवान के दिवंगत पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की जयंती मनाने का ऐलान किया है.सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी ये कवायद चिराग को अपने खेमे में लाने की एक और कोशिश है. हालांकि इस दिन राष्‍ट्रीय जनता दल का 25वां स्‍थान दिवस भी है. बता दें कि पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव में एलजेपी एनडीए से नाता तोड़कर अकेले मैदान में उतरी थी और उसे करीब छह फीसदी (26 लाख) वोट मिले थे. इस वजह से तेजस्‍वी यादव चाहते हैं कि अगर चिराग उनकी तरफ आ जाते हैं, तो 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव में इसका फायदा मिल सकता है. वैसे एलजेपी में टूट के साथ ही तेजस्वी यादव ने चिराग को अपने साथ आने का ऑफर दे दिया था. वहीं, कांग्रेस के राज्‍यसभा सांसद अखिलेया प्रसाद सिंह ने कहा था कि चिराग पासवान बिहार के बड़े नेता हैं और हर कोई चाहता है कि वो हमारे साथ रहें. जेडीयू और भाजपा ने तो उनके साथ धोखा किया है.

5 जुलाई से चिराग पासवान की 'आशीर्वाद यात्रा'

चिराग पासवान ने अपने दिवंगत पिता रामविलास पासवान के जन्मदिन पर 5 जुलाई से हाजीपुर से 'आशीर्वाद यात्रा' शुरू करने का ऐलान किया है. हाजीपुर संसदीय क्षेत्र उनके पिता की कर्मभूमि रहा है. यही नहीं, आशीर्वाद यात्रा पूरे बिहार में होगी और वे अपने लिए जन समर्थन की ताकत दिखाकर आगे कानूनी संघर्ष का रास्ता अख्तियार करेंगे.

चिराग-तेजस्वी की जोड़ी बदल देगी बिहार की सियासत

लोजपा में टूट के बाद चिराग पासवान के राजनीतिक भविष्य को लेकर बिहार में सियासी कयासबाजियों का दौर जारी है. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि इसकी पीछे जमीनी स्तर की वह राजनीति है, जिसमें पशुपति कुमार पारस भले ही अपने जनाधार का दावा करते हैं, लेकिन वास्तविक समर्थन चिराग पासवान के पक्ष में नजर आता है. इसका कनेक्शन वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव से भी जुड़ता है, क्योंकि सीएम नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के गठबंधन के खिलाफ जाकर भी चिराग ने अपने दम पर लोजपा को लगभग 26 लाख वोट दिलाए थे. एनडीए के खाते में 1 करोड़ 57 लाख 01 हजार 226 वोट पड़े थे. जबकि महागठबंधन के खाते में 1 करोड़ 56 लाख 88 हजार 458 वोट पड़े. अगर इसे प्रतिशत के लिहाज से देखें तो एनडीए को 37.26 फीसदी वोट मिले थे और महागठबंधन को 37.23 फीसदी वोट. महागठबंधन और एनडीए की जीत में फैसला केवल लगभग 12000 वोट का था.