West Bengal: प्रशांत किशोर के साथ बना रहेगा ममता बनर्जी का नाता, PK की टीम को बोर्ड में किया शामिल

कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal Assembly Election) में सत्ता विरोधी लहर को हराने और विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) अगले चुनाव को लेकर अभी से रणनीति बना रही हैं. इसके लिए तृणमूल कांग्रेस ने 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव तक चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishore or PK) की भारतीय राजनीतिक कार्रवाई समिति (I-PAC) को बोर्ड में शामिल कर लिया है.

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में उम्मीद से कम प्रदर्शन के बाद ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ पीके (Prashant Kishore) का दामन थामा था. विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में बीजेपी (BJP) 200 से ज्यादा सीट हासिल करने का दावा कर रही थी, लेकिन प्रशांत किशोर ने भविष्यवाणी की थी कि बीजेपी 100 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी. चुनाव परिणाम से साफ हो गया है कि पीके ने फिर से ममता बनर्जी को तीसरी बार सीएम का पद हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

अब विधानसभा चुनाव समाप्त हो गए हैं, लेकिन टीएमसी (TMC) से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पीके और ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के बीच नाता बना रहेगा. सूत्रों के मुताबिक, प्रशांत किशोर का संगठन पहले की तरह ही टीएमसी के साथ काम जारी रखेगा. इसमें पीके का ऑफिस और उनकी फील्ड उपस्थिति भी शामिल है. ये फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब हाल ही में प्रशांत किशोर ने 'बैकरूम बॉस' या चुनाव प्रबंधक का रोल छोड़ने का दावा किया था.

हाल ही संपन्न हुआ बंगाल विधानसभा चुनाव प्रशांत किशोर के लिए सबसे कठिन परीक्षा थी. पूर्वी राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पूरी ताकत झोंक दी थी. टीएमसी के कई शीर्ष नेता और बंगाल सिनेमा के जाने-माने चेहरे भी दीदी के खिलाफ भगवा ब्रिगेड को मजबूत करते नजर आए थे.

राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर 2015 के बिहार चुनाव में पहले सफल बीजेपी विरोधी महागठबंधन के वास्तुकार भी थे. इसके अलावा उन्होंने आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी, तमिलनाडु में एमके स्टालिन और दिल्ली में अरविंद केजरीवाल को सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है

प्रशांत किशोर ने बीते हफ्ते मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अध्यक्ष शरद पवार से भी मुलाकात की थी. राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात की खूब चर्चा हुई. हालांकि, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं और प्रशांत किशोर ने इसे निजी मुलाकात ही बताया है, जो बीजेपी के खिलाफ ममता बनर्जी का समर्थन करने वालों को धन्यवाद देने की औपचारिकता का एक हिस्सा था.