मनीष स‍िसोद‍िया सबूत से कर सकते हैं छेड़छाड़ SC के सामने CBI-ED की दलील, जमानत पर फैसला सुरक्ष‍ित

दिल्ली शराब नीति मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष स‍िसोद‍िया की जमानत याच‍िका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्ष‍ित रख ल‍िया है. कोर्ट ने सीबीआई और ईडी दोनों ही मामले में सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा ल‍िया है. ईडी और सीबीआई की तरफ से दलील दी गई कि अगर मनीष सिसोदिया को जमानत दी जाती है तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं. इस मामले में प्रवर्तन न‍िदेशालय (ईडी) की ओर से एएसजी एस राजू रामचंद्रन ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश कीं. सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे की प्रगति के बारे में पूछा कि इस मामले में लगभग 21,000 से 30,000 दस्तावेज हैं, 290 से अधिक गवाह हैं. कैसे समय से ट्रायल पूरा होगा. इस पर एएसजी एसवी राजू ने कहा कि अदालत 6 महीने में कोर्ट देख सकता है कि हमने इसमे कितनी प्रगति की है. निचली अदालत ने मुझे सभी दस्तावेज देने का निर्देश दिया है ताकि मुकदमे में देरी न हो. उन्‍होंने कहा क‍ि 9 से 12 महीने मे ट्रायल पूरा हो जाएगा.


मनीष सिसोदिया के वकील ने कहा कि सीधे तौर पर सिसोदिया से जुड़ा कोई साक्ष्य नहीं है, सभी साक्ष्य दस्तावेजी प्रकृति के हैं. उन्‍होंने कहा कि सिसोदिया को सलाखों के पीछे रखने की कोई जरूरत नहीं है, उनके भागने कोई खतरा नहीं है. ईडी का यह कहना गलत है कि नई शराब नीति के कारण कीमतें बढ़ीं, जबकि पॉलिसी के बाद ग्राहकों को मिलने वाली कीमत भी कम हुई. सिसोदिया के वकील ने कहा कि ED का आरोप यह है कि नई शराब नीति ही धोखा देने के लिए बनाई गई, जबकि नई नीति समितियों द्वारा विचार-विमर्श के बाद पारदर्शी तरीके से बनाई गई और तत्कालीन एलजी ने इसकी मंजूरी दी थी.

 

सिसोदिया के वकील ने कहा कि इंडोस्पिरिट्स को लेकर यह आरोप है कि याचिकाकर्ता ने इंडोस्पिरिट को लाइसेंस देने के लिए उत्पाद शुल्क अधिकारियों पर दबाव डाला, जबकि इस आरोप को लेकर जांच एजेंसी के पास सबूत नहीं है, फाइल से पता चलता है कि उन्होंने नियम के अनुसार काम करने का निर्देश दिया है. स‍िसोदि‍या के वकील मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट को कहा क‍ि सीबीआई केस में कोई आरोप नहीं है, अगर कोई अपराध नहीं है तो ईडी वहां नहीं आ सकती. जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि ED यह नहीं कह रही है कि पैसा आपके पास आया है. ED कह रही है सिसोदिया की संलिप्तता के कारण अपराध की आय में सहायता हुई. सिसोदिया के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ किसी मनी ट्रेल का पता नहीं चला. जांच एजेंसी कहती है कि एक कंपनी ने मुनाफा कमाया और नीति मैंने बनाई थी जिससे कंपनी को मदद मिली.

सिंघवी ने आगे कहा क‍ि जांच एजेंसियां कहती हैं कि चूंकि मेरी नीति ने एक कंपनी को मुनाफा कमाने में सक्षम बनाया, इसलिए मैं इसमें शामिल हूं, जबकि जांच एजेंसी को मुझे या मेरे परिवार के सदस्यों को कोई पैसा दिया जाना नहीं मिल पाया. अब वे कहते हैं कि एक कंपनी द्वारा अर्जित मुनाफा अपराध की आय है. आरोपों का मुझसे कोई संबंध नहीं दिखता. यह दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं है कि मैंने इंडोस्पिरिट्स को लाइसेंस देने में हस्तक्षेप किया. जब ट्रायल शुरू होना है और जब मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं है तो आप मुझे 500 गवाहों और 50,000 दस्तावेजों की दलील देकर सलाखों के पीछे नहीं रख सकते.

कोर्ट ने कहा क‍ि आरोप है वह एयरपोर्ट (लाइसेंस) के संबंध में नीति में संशोधन किया गया है. क्या यह मुख्य अपराध का हिस्सा नहीं है…? इस पर सिंघवी ने कहा क‍ि 7 सितंबर और 9 अप्रैल के बयानों में, दिनेश अरोड़ा ( जो सरकारी गवाह बना है) ने कहा कि कोई भी धनराशि नहीं मिली. आठ तारीखों पर उन्होंने कोई आरोप नहीं लगाया. एक साल बाद 14 अगस्त को पहली बार आरोप लगाया. मनीष सिसोदिया के वकील ने कहा कि विजय नायर को प्रिडिकेट ऑफेंस में जमानत मिल चुकी है, विजय नायर से मेरे संबंध को दिखाने के लिए जांच एजेंसी के पास कुछ नहीं है. मनीष सिसोदिया के वकील ने कहा ED का आरोप है कि मनीष सिसोदिया ने अपने फोन को नष्ट किया, एफआईआर दर्ज होने से पहले फोन बदलना सबूतों से छेड़छाड़ कैसे बन गया?