धनतेरस-दिवाली पर अपशकुन से बचाता है स्वास्तिक

दीपावली और धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन का बड़ा महात्म्य है. किसी भी पूजा में स्वास्तिक बनाना भी अनिवार्य है, क्योंकि यह शुभ मंगल का द्योतक है. किसी भी कार्य के शुभ और सफल होने की कामना में स्वास्तिक बनाया जाता है. अगर स्वयं पूजा कर रहे हैं तो स्वास्तिक बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखें. अक्सर लोग पूजा स्थल, घर की दीवारों पर, पुस्तक, बहीखाते में स्वास्तिक बनाकर मंगल की कामना करते हैं. लेकिन स्वास्तिक बनाए कैसे. वो भी शुद्ध रूप से. आइए जानते हैं तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डाॅ. कृष्ण कुमार भार्गव से.

स्वास्तिक बनाने के लिए क्या चाहिए
स्वास्तिक तीन शब्दों से मिलकर बना है. सु, अस्ति और क. सु मतलब मंगल, अस्ति यानी हो. और क मतलब करने वाला. यानी मंगल करने वाला. स्वास्तिक बनाने के लिए आपके पास एक साफ कपड़ा हो. घिसा हुआ लाल चंदन हो और देसी घी में घोली हुई रोली या कुमकुम. घी नहीं है तो स्वच्छ जल का प्रयोग करें. इसके साथ ही आपके पास शुद्ध गंगा जल भी होना चाहिए. अगर गंगा जल नहीं है तो साफ पानी का इस्तेमाल करें.
स्वास्तिक बनाने की विधि
सबसे पहले जहां आपको स्वास्तिक बनाना है. मसलन दीवार, पूजा स्थल, बहीखाता, पुस्तक या भूमि. वहां गंगाजल या स्वच्छ पानी छिड़ककर थोड़ा लेपन करें. अब इस जगह को साफ और शुद्ध कपड़े से पोंछ लें. अगर आप पुस्तक पर बना रहे हैं, जोकि कागज से निर्मित है तो लेपन न करें, हल्का छिड़काव कर लें.

अब स्वास्तिक बनाएं
सबसे अपनी अनामिका उंगली के पोर (सिरा) से कुमकुम उठाएं. यानी टच करें. अनामिका उंगली सबसे छोटी उंगली के बगल वाली उंगली है. अनामिका उंगली से कुमकुम उठाने के बाद आपको जिस अनुपात में स्वास्तिक बनाना हो. उस अनुपात में 9 टीके बनाएं. आसान तरीका ये है कि जिस पृष्ठ पर आपको स्वास्तिक बनाना है. उसके बीच में एक टीका लगाएं. फिर उसके ऊपर, फिर उसके बगल में निश्चित दूरी पर टीका लगाएं. फिर एक टीका नीचे लगाएं और फिर थोड़ा नीचे आकर एक टीका लगाएं और अब इस टीके के बायीं ओर बढ़ते हुए निश्चित दूरी पर टीका लगाकर ऊपर की ओर बढ़ते जाएं. इस तरह आप 9 बिंदु बना लेंगे. अब आपको कुमकुम उठाना है. और दायीं ओर से सबसे नीचे कोने में जो बिंदु है, उससे शुरू करेंगे. फिर उसके ऊपर वाले बिंदु को मिलाएंगे. फिर मध्य वाले बिंदु को. अब इसके ऊपर वाले बिंदु को मिलाएंगे और फिर दायीं ओर बगल वाले बिंदु से मिलाकर छोड़ देंगे.
अब दोबारा से कुमकुम लें और अपने बायीं ओर सबसे नीचे कोने में स्थित बिंदु से शुरू करेंगे. नीचे वाले बिंदु से शुरू करते हुए उसके दायीं ओर वाले बिंदु को मिलाएंगे. फिर सबसे मध्य में स्थित बिंदु को टच करेंगे. और उसके बगल वाले बिंदु को मिलाकर सबसे ऊपर वाले बिंदु को टच करेंगे. इस तरह का आपका स्वास्तिक तैयार हो जाएगा. अगर कुमकुम हल्का है. तो फिर से मिला लें. चूंकि स्वास्तिक की चार रेखाएं चार दिशाओं की द्योतक हैं तो स्वास्तिक के चारों मुखों के कोनों को आप थोड़ा-थोड़ा आकार दे सकते हैं.

इसके बाद कुमकुम उठाएं अनामिका उंगली से ही और सबसे बीच में एक टीका लगाएं और उसके बाद घड़ी की दिशा की तरह सबसे ऊपर अपनी दायीं ओर टीका लगाएं फिर उसके नीचे और इसी तरह बढ़ते जाएं. बीच वाले टीके को मिलाकर कुल 5 टीके होंगे. अब स्वास्तिक के अगल-बदल दो रेखाएं खींचे. ये कार्य भी कुमकुम से ही होगा और प्रयोग अनामिका उंगली का ही करेंगे. स्वास्तिक के दायीं और बायीं ओर दो-दो रेखाएं खींचे. जोकि स्वास्तिक के आकार से थोड़ी बड़ी हों. ज्यादा बड़ी नहीं होनी चाहिए.