मप्र हाईकोर्ट की पहल पर पहाडि़यों को संरक्षित करने के लिये कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी कमेटी
ग्वालियर में पहाड़ों को अतिक्रमण-उत्खनन माफिया से बचाने बनेंगे सिटी फॉरेस्ट
ग्वालियर। शहर की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण को बचाने के लिए हाईकोर्ट ने एक प्रभावी कदम उठाया है। तेजी से बढ़ रहे अवैध अतिक्रमण और उत्खनन को देखते हुए न्यायालय ने सख्त आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पहाड़ियों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इसके तहत सिटी फॉरेस्ट तैयार करने की बात कही गई है। हाईकोर्ट ने कहा है कि कलेक्टर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाए, जो हर 15 दिन में बैठक कर कार्ययोजना तैयार करे और उसके क्रियान्वयन की निगरानी करे।
हाईकोर्ट ने ये प्रमुख टिप्पणियां कीं
पहाड़ों से हरियाली खत्म होने से ग्वालियर के हीट जोन बनने का खतरा
पहाड़ियों का क्षरण, पर्यावरण और तापमान पर सीधा असर डाल रहा है
अब पूरे शहर पर फोकस-गुड़ा पहाड़ी पर याचिका…
शहर में गुड़ा गांव की पहाड़ी पर अतिक्रमण और अवैध उत्खनन के खिलाफ दायर जनहित याचिका के मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्ती दिखाई। अब हाईकोर्ट ने पूरे ग्वालियर शहर के आसपास की सभी पहाड़ियों को संरक्षण योजना में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने सिरोल पहाड़ी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हजारों की संख्या में पौधे लगाए गए, जो अब पेड़ का आकार ले रहे हैं। हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ पौधारोपण से काम नहीं चलेगा, बल्कि लंबे समय तक उनकी देखभाल जरूरी है। हाईकोर्ट ने कहा कि मिट्टी भराव, फेंसिंग और अतिक्रमण रोकने के उपाय जरूरी हैं। इसके अलावा नर्सरी तैयार कर अधिक से अधिक पौधे लगाने की जरूरत है।
कमेटी में कौन-क्या करेगा
अध्यक्ष: कलेक्टर
पुलिस अधीक्षक: अवैध उत्खनन और अतिक्रमण पर निगरानी
नगर निगम कमिश्नर: शहरी प्रबंधन और संरक्षण उपायों का क्रियान्वयन
खनन विभाग: अवैध उत्खनन की रोकथाम
कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक: पौधों की गुणवत्ता और उपयुक्त प्रजातियों का चयन
अन्य जिम्मेदारियां:
आयुर्वेद विभाग: औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों का संरक्षण
पशु चिकित्सा विभाग: ऐसे पौधों का चयन जो वन्य व घरेलू पशुओं के लिए उपयोगी हों
वन विभाग: जैव विविधता और वृक्षारोपण में सहयोग
सामाजिक संगठन, एनएसएस, एनसीसी: जनभागीदारी
कमेटी 15 दिन में बैठक कर कार्ययोजना बनाएगी।
आगे क्या…
कमेटी के गठन के बाद ग्वालियर के आसपास की सभी पहाड़ियों को अतिक्रमण और अवैध उत्खनन से बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। पेड़-पौधों का संरक्षण, जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उपाय किए जाएंगे।