ग्वालियर के 38 सहित राज्य के 120 अस्पतालों पर लटका आयुष्मान का संकट, राज्य के स्वास्थ्य विभाग में लटके एनएबीएच पेडेंसी करें राज्य सरकार खत्म सुधार के लिए सिर्फ 6 दिन
ग्वालियर. शहर में मरीजों का समय उपचार नहीं होने की वजह से हाहाकार स्थिति बनने जा रही है और जो लोग आयुष्मान भारत योजना का ढिंढोरा पीट सरकार आयुष्मान योजना का लाभ महज कागजों पर रह गया है। पिछले काफी दिनों से आयुष्मान अस्पतालों का लंबे समय भुगतान रूका हुआ है। इससे सरकार रवैया साफ नजर नहीं आ रहा है। मध्यप्रदेश की सरकार मरीजों को मरने के लिये छोड़ दिया है। जिनका नर्सिंग होमों NABH का अपडेट पेंडिंग है उन पर सरकार को विचार करना चाहिये। ग्वालियर केक 38 निजी अस्पतालों समेत राज्य के 120 अस्पतालों पर योजना से बाहर होने की तलवार लटक रहीं है। नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल (NABH) का अनिवार्य सर्टिफिकेट नहीं होने की वजह राज्य के 120 अस्पतालों को आयुष्मान योजना केक पैनल से बाहर कर दिया जायेगा। स्वास्थ्य विभाग ने इन अस्पतालों को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट कियाहै कि यदि इस सप्ताह के अन्दर कमियां दूर नहीं की गयी तो उनका आयुष्मान ब्रेक लग जायेगा। यानी उन्हें पोर्टल से डी-पैनल (पैनल से बाहर) कर दिया जायेगा। यह तो जनता के साथ अन्याय भरा व्यवहार होगा।
छोटे अस्पताल करते हैं सबसे ज्यादा इलाज
राज्यभर के लगभग 90% निजी अस्पताल अभी एंट्री लेवल एनएबीएच पर ही कार्यरत हैं। ये वही अस्पताल हैं जहां आयुष्मान कार्ड धारकों की सबसे ज्यादा भीड़ होती है। इन अस्पतालों पर ग्रामीण और शहरी गरीबों का सीधा भरोसा है। वहीं दूसरी ओर फुल एनएबीएच वाले अस्पताल ज्यादातर कॉर्पोरेट या फाइव स्टार हॉस्पिटल होते हैं, जहां गंभीर या विशेष बीमारियों का इलाज होता है और आमतौर पर वहां आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज कराना मुश्किल होता है। जिले में 20 सरकारी और 73 प्राइवेट हॉस्पिटल में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को इलाज मिल रहा है। इनमें से 35 अस्पताल ही ऐसे हैं जो एनएबीएच प्रमाणित हैं। वर्तमान में 38 अस्पताल एनएबीएच प्रमाणित नहीं हैं।
इसलिए हो रही अस्पतालों पर कार्रवाई
आयुष्मान भारत योजना के कड़े मानकों के अनुसार, पैनल में शामिल अस्पतालों के पास नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स (एनएबीएच) का प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। यह सर्टिफिकेट अस्पताल में सुविधाओं की गुणवत्ता और मरीज की सुरक्षा की गारंटी होता है।
इस सप्ताह का समय दिया है
जिन अस्पतालों में एनएबीएच को लेकर जो कमियां हैं उन्हें दूर करने के लिए इस सप्ताह का समय दिया गया है।
फिर भी कमियां दूर नहीं हुईं तो उन पर फैसला आगामी सप्ताह लगेगा।
डॉ. योगेश भरसट, सीईओ, आयुष्मान योजना
शासन को बात करनी चाहिए
आयुष्मान योजना में एनएबीएच लागू करने से पहले नर्सिंगहोम प्रतिनिधियों से बातचीत शासन को करनी चाहिए, क्योंकि अभी जिस प्रकार से नियम थोपी जा रहे हैं उनमें खामियां हैं।
इसलिए नर्सिंगहोम प्रतिनिधियों से साथ बैठकर इन खामियों को दूर किया जाए।
डॉ. राकेश राजवाड़ा, प्रदेशाध्यक्ष, प्राइवेट नर्सिंगहोम एसोसिएशन