कोरोना के बाद दुनिया में H3N2 वायरस की दस्तक, रूस में मिला पहला केस

मॉस्को. रूस में स्वाइन फ्लू (H3N2) वायरस के पहले केस का पता चला है. पहली बार 2011 में H3N2 वायरस का पता चला था. रूस में फ्लू वायरस की महामारी की बढ़ने के दौरान इसका पता चला है. उपभोक्ता अधिकार संरक्षण और मानव कल्याण की निगरानी के लिए रूसी संघीय सेवा-रोस्पोट्रेबनादज़ोर (Russian Federal Service for Surveillance on Consumer Rights Protection and Human Wellbeing-Rospotrebnadzor) की प्रमुख अन्ना पोपोवा ने विभाग के बोर्ड की एक बैठक में ये घोषणा की. शनिवार को पोपोवा के हवाले से कहा गया कि पिछले हफ्ते देश में पहले स्वाइन फ्लू (H3N2) वायरस का पता चला था. जो मिस्र से रूस में आया मामला था. अब तक रूस में कोई अन्य स्वाइन फ्लू वायरस का मामला नहीं हैं.

न्यूज एजेंसी तास के मुताबिक मौजूदी फ्लू महामारी की हालत के बारे में पोपोवा ने कहा कि देश महामारी के एक नए चरण से पहले की स्थिति में है. अक्टूबर 2021 से मई 2022 तक रूस में इन्फ्लूएंजा का प्रकोप पिछले सीजन की तुलना में काफी अधिक था. रूस में इन्फ्लूएंजा और सांस के वायरल संक्रमण की महामारी की स्थिति के मूल्यांकन के लिए वैज्ञानिक परिषद के तहत एक विशेष कार्य समूह बनाया गया है. इन्फ्लूएंजा और सांस के वायरल संक्रमण की महामारी की निगरानी के साथ-साथ इसकी देखरेख करने वाले नियमों को नए सिरे से तय करने के भी निर्देश दिए गए हैं.

पहली बार 2011 में H3N2 वायरस का पता चला
H3N2 वायरस या स्वाइन फ्लू वायरस एक गैर-मानव इन्फ्लूएंजा वायरस है जो आम तौर पर सूअरों में फैलता है और ये मनुष्यों को संक्रमित करता है. आमतौर पर सूअरों में फैलने वाले वायरस ‘स्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस’ होते हैं. जब ये वायरस इंसानों को संक्रमित करते हैं, तो उन्हें ‘वैरिएंट’ वायरस कहा जाता है. 2011 में पहली बार एवियन, स्वाइन और मानव फ्लू वायरस के जीन और 2009 की H1N1 महामारी के वायरस के M जीन के साथ एक विशिष्ट H3N2 वायरस का पता चला था. यह वायरस 2010 से सूअरों में फैल रहा था और पहली बार 2011 में लोगों में इसका पता चला था. 2009 के M जीन को शामिल करने से यह वायरस अन्य स्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस की तुलना में मनुष्यों को अधिक आसानी से संक्रमित कर सकता है.