Odisha Panchayat Election: ओडिशा में भाजपा का गढ़ कहलाता था ये जिला, लेकिन पंचायत चुनाव में साफ हो गई पार्टी

ओडिशा में सत्ताधारी बीजू जनता दल (BJD) राज्य के पंचायत चुनाव (Odisha Panchayat Election) में पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए बहुत भारी जीत की ओर बढ़ रही है. राज्य की 853 जिला परिषद सीटों में से 851 पर चुनाव हुए थे. बीजू जनता दल ने अब तक आधिकारिक रूप से घोषित 315 जिला परिषद सीटों के नतीजों में से नब्बे फीसद सीटों पर जीत हासिल कर ली है. कोविड-19 महामारी के कारण जन सभाओं पर लगी रोक के कारण ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के प्रचार नहीं करने के बावजूद बीजद को ये जीत मिली है.

बीजू जनता दल ने अब तक 282 सीटों पर जीत हासिल की है. जबकि उसकी विरोधी पार्टियां-बीजेपी और कांग्रेस क्रमश: 15 और 14 सीटों पर ही सिमट कर रह गईं हैं. निर्दलीय प्रत्याशी 2 सीटों पर विजयी हुए हैं, जबकि छोटी पार्टियों को भी इतनी ही सीटें मिली हैं. नेली जिले में एक सीट का नतीजा अभी घोषित नहीं किया गया है. मतगणना के अब तक के नतीजों से साफ है कि बीजू जनता दल को भारी जीत मिलने जा रही है. अब नतीजों के नंबरों में समय के साथ थोड़ा-बहुत ही फेरबदल होने की उम्मीद है. 230 सीटों की मतगणना सोमवार को हो रही है. अब तक के नतीजों से साफ है कि सभी 30 जिलों में जिला परिषदों पर बीजू जनता दल का कब्जा होने जा रहा है. मतगणना के पहले दिन विपक्षी पार्टियां 20 जिलों में अपना खाता खोलने में भी सफल नहीं हो पाईं.

बीजू जनता दल की रणनीति के आगे भाजपा को पश्चिमी ओडिशा के मयूरभंज सहित सभी जिलों में भी हार का सामना करना पड़ा है. जबकि मयूरभंज को भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है. भाजपा ने 2017 के पंचायत चुनाव में 8 जिला परिषदों पर कब्जा करने में सफलता हासिल कर ली थी. ओडिशा के पश्चिमी क्षेत्र में बीजेपी ने उड़ीसा के पश्चिम इलाके में 5 लोकसभा सीटों पर भी 2019 के आम चुनाव में विजय हासिल की थी. बहरहाल इस बार के पंचायत चुनाव में तमाम मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरने के बावजूद विपक्षी दल बीजेपी को कोई खास सफलता नहीं मिली.

बीजू जनता दल सरकार की ‘पालने से कब्र तक’ (cradle-to-grave schemes) योजना और हाल ही में BSKY के तहत स्मार्ट हेल्थ कार्ड स्कीम ने इस भारी विजय में बहुत बड़ा योगदान दिया है. इसके कारण ग्रामीणों ने बीजद को वोट देना पसंद किया. इसके साथ बीजद सरकार ने कुछ डायरेक्ट कैश ट्रांसफर स्कीम भी चलाई थी. जिसका लाभ ग्रामीणों को मिला और उन्होंने सत्ताधारी पार्टी को दिल खोलकर वोट दिए. बीजद की जीत में जो दूसरे कारण अहम माने जा रहे हैं, उनमें नवीन पटनायक की लोकप्रियता और साफ-सुथरी इमेज का भी बहुत हाथ है. राज्य में बहुत ही लंबे समय से बीजद सत्ता में है और उसका संगठन बहुत मजबूत है.

बालासोर से बीजेपी के एमपी और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रताप सारंगी ने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव में राज्य सरकार ने खुलकर पैसे का इस्तेमाल किया. जिसके कारण उनकी पार्टी की हार हुई. पंचायत चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए एक बहुत बड़ा धक्का हैं. जो राज्य में अपनी चुनावी जीत का सिलसिला आगे बढ़ाना चाहती थी. 2017 में भाजपा ने 297 जिला पंचायत सीटों पर जीत हासिल की थी. जो उससे पांच साल पहले के 36 सीट से बहुत बड़ी छलांग थी.