पुलिस ने किसान पर लगाया था 4 कारतूस रखने का आरोप, 26 साल बाद कोर्ट ने किया बरी
मुजफ्फरनगर. उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर न्यायालय (Muzaffarnagar court) ने शामली (shamli) जिले के एक किसान को चार कारतूस रखने के मामले से मुक्त कर दिया है. कस्बा बनत के किसान सलाउद्दीन को चार कारतूस रखने के आरोप से 26 साल बाद बरी किया गया. दरअसल शामली जनपद के कस्बा बनत निवासी सलाउद्दीन को मुजफ्फरनगर शहर कोतवाली पुलिस ने 1995 में मिमलाना रोड से गिरफ्तार किया था. उस समय पुलिस ने सलाऊद्दीन पर 12 बोर के चार कारतूस बरामदगी का आरोप लगाया था. इस मामले में पुलिस अदालत में कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई.
अभियोजन की मानें तो 5 जून 1995 को तत्कालीन शहर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक पीएन सिंह को सूचना मिली थी, कि कुछ लोग मिमलाना रोड की तरफ से अवैध हथियारों के साथ आ रहे हैं. प्रभारी निरीक्षक के निर्देश पर उप निरीक्षक युवराज सिंह ने चेकिंग के दौरान सलाउद्दीन को चार कारतूस के साथ दबोच लिया था. सलाउद्दीन को गिरफ्तार कर उस समय धारा-25 शस्त्र अधिनियम के तहत उसका चालान कर दिया गया था. इसके बाद वह 20 दिन जेल में रहा जिसके बाद बेल मिलने पर वह रिहा हो गया. तत्कालीन डीएम से अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति लेकर विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी.
मुकदमे की सुनवाई सीजेएम कोर्ट में हुई. पेश की गई चार्जशीट पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए 17 जुलाई 1999 को सलाउद्दीन पर आरोप तय कर दिए थे, जिसके बाद फाइल सुबूत में चली गई. कोर्ट ने अभियोजन को सलाउद्दीन के विरुद्ध सुबूत पेश करने के लिए समय दिया. कई बार पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद अभियोजन आरोपी के विरुद्ध सुबूत नहीं जुटा सका. कोर्ट ने 20 साल बाद आठ अगस्त 2019 को सुबूत का समय समाप्त कर दिया था.
इस तरह 20 वर्ष में भी आरोपी के विरुद्ध कोर्ट में सुबूत पेश नहीं किया जा सका. यहां तक कि माल मुकदमा भी कोर्ट में पेश नहीं किया गया. अभियोजन साक्ष्य का समय समाप्त होने के बाद सीजेएम कोर्ट में आरोपी के धारा-313 के तहत बयान लिया गया. सलाउद्दीन ने आरोपों को निराधार बताया. इसके बाद दोनों पक्षों की सुनवाई कर सीजेएम मनोज कुमार जाटव ने आरोपी सलाउद्दीन को संदेह का लाभ देते हुए दस नवंबर को बरी कर दिया था.