जीआरएमसी एंटीबॉडीज का पता लगाने वाला प्रदेश का पहला मेडीकल कॉलेज होगा
ग्वालियर. कोरोना से लड़ने वाली एंटीबॉडीज की ताकत का पता लगाने के लिये गजराराजा मेडीकल कॉलेज (जीआरएमसी) शोध करन जा रहा है। ग्वालियर में एक साथ 2 शोध किये जायेंगे। अगले सप्ताह से शुरू करने जा रहे पहले शोध में 18 वर्ष कम आयु के लगभग 400 बच्चों के सैम्पल लिये जायेंगे तो 17 जुलाई के बाद प्रस्तावित दूसरे शोध में 18 वर्ष से अधिक आयु के 200 लोगों के सैम्पल लिये जायेंगे। न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबांडी टेस्ट के माध्यम से यह पता किया जायेगा कि जो एंटी बॉडी बनी है, वह कोरोना वायरस से लड़ने में सक्षम हैं या नहीं। इस विषय पर शोध करने के लिये कॉलेज की एथिकल कमेटी ने अनुमति दे दी है।
इस शोध कार्य में जीआरएमसी इस टेस्ट के माध्यम से एंटीबॉडीज के विषय में शोध करने वाला मप्र का इकलौता मेडीकल कॉलेज होगा। शोध में प्रो. सविता भरत, प्रो. वैभव मिश्रा, प्रो. रंजनातिवारी, को -प्रिसिंपल इन्वेस्टिगेटर ऋषिका खेतान व असिस्टेंट प्रोफेसर मनोज बंसल की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
इस तरह से किया जाएगा न्यूट्रिलाइजिंग टेस्ट
ब्लड सैंपल को एंटीजन वाली किट में डाला जाएगा, जो कोविड वायरस के स्ट्रक्चर में मौजूद स्पाइक प्रोटीन से बनता है। सैंपल को इसके संपर्क में लाया जाएगा। दोनों के एक दूसरे से अच्छे तरीके से जुड़ने पर ये माना जाएगा कि जिस व्यक्ति का ये सैंपल लिया गया है, उसके शरीर में बनी एंटीबाॅडीज वायरस से लड़ने में सक्षम हैं। यदि जुड़ाव अच्छी नहीं है तो कि एंटीबाॅडीज कारगर नहीं होगी।
18 साल से अधिक आयु के लाेगाें के शोध में 4 बार लेंगे सैंपल
18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों पर होने वाले शोध में 4 बार सैंपल लिए जाएंगे। दूसरा सैंपल एक माह बाद लिया जाएगा। तीसरा सैंपल तीसरे माह और चौथा सैंपल छठे माह लिया जाएगा। इससे ये पता चल सकेगा कि एंटीबाॅडीज किस मात्रा में घट-बढ़ रही हैं, साथ ही वायरस से लड़ने की क्षमता का भी अध्ययन किया जाएगा।
डाॅ. वैभव मिश्रा, प्रो. माइक्रोबायोलाॅजी विभाग