प्रियंका गांधी का योगी सरकार पर निशाना, कहा- युवाओं को रोजगार के लिए रुला रही, दलितों का हो रहा उत्पीड़न
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों (UP Assembly Elections 2022) को देखते हुए कांग्रेस (Congress) इन दिनों युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटी हुई है. कांग्रेस लंबे समय से यूपी में जर्जर हो चुके अपने संगठन को हर एक गांव तक एक बार फिर से मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है. साथ ही सत्ताधारी बीजेपी से निपटने और उनकी नाकामियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अपने प्रदेश, जिला, शहर, ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर से जुड़े पदाधिकारियों को प्रशिक्षित भी कर रही है. इस दौरान कांग्रेस ने गांव-गरीब, किसान-नौजवान, अपराध-भ्रष्टाचार और मंहगाई जैसे आम जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर सरकार को बेनकाब करने की भी विशेष रणनीति बनाई है. इसके तहत इन दिनों खुद कांग्रेस महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी सोशल मीडिया पर इन मुद्दों को लेकर योगी सरकार पर हमलावर हैं. उन्होंने कहा कि योगी सरकार युवाओं को रोजगार के लिए रुला रही है.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सोमवार को यूपी में दलित उत्पीड़न के साथ बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर फेसबुक पोस्ट कर योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान प्रियंका गांधी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, 'आज़मगढ़, रौनापार के पलिया गांव में यूपी पुलिस द्वारा दलित परिवारों पर हमला करने की खबर आ रही है. वहां कई मकानों को तोड़ा गया, सैकड़ों पर मुकदमा दर्ज किया गया. यह सरकारी अमले की दलित विरोधी मानसिकता का परिचायक है. तत्काल दोषियों के पर कार्रवाई हो और पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए.'
युवाओं के आंसू दूर करेंगे सरकार का घमंड
इस दौरान प्रिंयंका ने यूपी के बेराजगारी के मुद्दे पर फेसबुक पोस्ट करते हुए लिखा, 'यूपी सरकार युवाओं को रोजगार के लिए रुला रही है. युवाओं की आंखों से निकला एक-एक आंसू सैलाब बनकर इस सरकार के घमंड को चकनाचूर करेगा. ढकोसलों के इतर जब सचमुच में सामाजिक न्याय लागू करने की बात आती है, तो यह सरकार बात तक सुनने को तैयार नहीं होती. युवा इसका हिसाब लेंगे. बीजेपी सरकार के झूठे विज्ञापनों में तो लाखों रोजगार बांटने की बात कही जा रही है. कहां बांट दिए ये रोजगार? युवा इन झूठे प्रचारों की हकीकत बता रहे हैं. हर दिन बेरोजगार युवा विरोध प्रदर्शन के जरिए यूपी सरकार से रोजगार मांगने के लिए आते हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने की बजाय पुलिसिया धौंस दे रही है.'