ब्लैक फंगस के बाद व्हाइट फंगस की ग्वालियर में एंट्री, जेएएच में 43 बिस्तरों का वार्ड अलग से शुरू
ग्वालियर. तेजी से बढ़ रहें ब्लैक फंगस के मामलों को देखते हुए जयारोग्य अस्पताल प्रबंधन ने 12 बिस्तरों से बढ़ाकर अब 43 बिस्तरों का वार्ड अलग से शुरू कर दिया है। ब्लैक फंगस के मरीजों को अब एचडीयू-10 में भर्ती किया जाएगा। वहीं कोरोना और ब्लैक फंगस के बीच अब व्हाइट फंगस की भी ग्वालियर में एंट्री हों गई है। टीबी एंड चेस्ट रोग विशेषज्ञों के पास ऐसे मामले पहुंच रहे है जो व्हाइट फंगस के शिकार हुए है।
व्हाइट फंगस (कैंडिडोसिस) फेफड़ों के संक्रमण का मुख्य कारण है। फेफड़ों के अलावा, स्किन, नाखून, मुंह के अंदरूनी भाग, आमाशय और आंत, किडनी, गुप्तांग और ब्रेन आदि को भी यह संक्रमित करता है।
पहले भी जब कोरोना नहीं था तब भी ब्लैक व व्हाईट फंगस था- डॉ. अनुपम ठाकुर, चेस्ट रोग विशेषज्ञ
ब्लैक फंगस के बाद अब व्हाइट फंगस को लेकर लोगों में दहशत है। शहर के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपम ठाकुर के अनुसार कोरोना संक्रमण के कारण ब्लैक और ब्हाइट फंगस सामान्य है। इसमें घबराने वाली बात नहीं है लेकिन जरूरी ये है कि समय रहते इसका इलाजा हो। पहले भी जब कोरोना नहीं था तब भी ब्लैक व व्हाईट फंगस के मरीज सामने आते थे लेकिन कोरोना काल में आए ब्लैक फंगस को लेकर इतना ज्यादा पैनिक हो गया है कि दवाइयां तक मिलना मुश्किल हो गई है। जबकि एंटी फंगल दवा देने से मरीजों को ठीक किया जा सकता है।