रफ्तार पकड़ने लगा कोरोना इंदौर, दिल्ली और मथुरा से लौटे लोग संक्रमित, फिर भी न नए स्ट्रेन की जांच और न बाॅर्डर पर स्क्रीनिंग
जिले में कोरोना संक्रमण धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगा है। पिछले चार दिन में 58 नए संक्रमित सामने आ चुके हैं। मंगलवार को 15 नए मरीज मिले। इससे पहले 6 मार्च को जहां 12 संक्रमित मिले थे, वहीं 7 मार्च को 15 तथा 8 मार्च को 16 नए कोरोना संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं, लेकिन प्रशासन एहतियात नहीं बरत रहा है। इसका सबसे उदाहरण ये है कि जांच में जो मरीज संक्रमित निकल रहे हैं उनमें से कई इंदौर, मथुरा, दिल्ली व अन्य शहरों से लाैटे हैं।
इन मरीजों में कोरोना का नया स्ट्रेन है या नहीं, इसकी जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया है। डेढ़ माह पहले ब्रिटेन से आए युवक के बाद एक भी मरीज का सैंपल नए स्ट्रेन की जांच के लिए दिल्ली नहीं भेजा गया है। यही नहीं प्रशासन सड़क मार्ग से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग नहीं करा रहा है। बॉर्डर पर न ही इसके लिए नाके बनाए गए हैं और न ही गाड़ियों की जांच हो रही है। सवाल ये है कि क्या इंदौर जैसी स्थितियां बनने के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी।
केस-1: 25 फरवरी को थाटीपुर में दिल्ली लाैटे दो परिवाराें के 5 लोग संक्रमित निकले थे। माधौगंज में महिला संक्रमित निकलीं ताे उनके दो बेटे भी पाॅजिटिव गए। केस-2: 23 साल का युवक इंदाैर से घासमंडी लाैटा ताे बुखार आ गया। जांच में पॉजिटिव आया।
ये भी लापरवाही
कोरोना के मरीजों काे अस्पताल भेजने या हाेम क्वारेंटाइन करने के लिए किसी डॉक्टर को नोडल अधिकारी नहीं बनाया गया है। स्थिति यह है कि अगर कोई काेरोना पाॅजिटिव मिलता है तो उसके पास या तो फोन पर ही डॉक्टर दवा बता देता है और मरीज खुद मेडिकल स्टोर जाकर दवा लेता है।
कोरोना संक्रमितों की पीड़ा
बसंत विहार में रहने वाली एक महिला को कोरोना होने की पुष्टि हुई। उनके या उनके पति से अबतक किसी ने संपर्क नहीं किया है। वे खुद मरीज को लेकर निजी अस्पताल में भर्ती करने के लिए पहुंचे।
डीडी नगर के 48 वर्षीय व्यक्ति को कोरोना हुआ था। उनके पास फोन आया और वाट्सएप पर दवा बता दीं। वह जिला अस्पताल जाकर खुद दवा लेकर आए। तबियत खराब होने लगी तो खुद जेएएच में भर्ती हुए।
हजीरा निवासी 21 वर्षीय युवक को कोरोना होने पर फोन पर ही दवा बता दी गई। वह जिला अस्पताल जाकर खुद दवा लेकर आया।
रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड सहित बॉर्डर पर स्क्रीनिंग का सिस्टम ही नहीं
रेलवे स्टेशन: दिल्ली, महाराष्ट्र के साथ भोपाल, इंदौर व देश के दूसरे शहरों में भी कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं। इन स्थानों से ग्वालियर के लिए ट्रेन कनेक्टिविटी है और रोजाना सैकड़ों लोग ट्रेन से शहर में आ रहे हैं। स्टेशन पर दूसरे शहरों से आने वाले लोग जिस गेट से स्टेशन के बाहर आ रहे हैं, वहां थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं है।
बस स्टैंड: अंतरराज्यीय बस स्टैंड, झांसी रोड बस स्टैंड व वीडियोकोच बस स्टैंड में से एक भी जगह थर्मल स्क्रीनिंग, मास्क, सेनिटाइजर का उपयोग नहीं किया जा रहा। लोग बेरोकटोक आ जा रहे हैं। बसों में भी क्षमता से ज्यादा लोगों को भरा जा रहा है। जबकि बीते दिनों व्यवस्था बनाई गई थी कि तय संख्या से ज्यादा सवारियां बस में न बिठाई जाएं।
बॉर्डर: प्लेन, ट्रेन और बसों के अलावा आगरा रोड, भिंड रोड, इंदौर रोड और झांसी रोड बॉर्डर से रोजाना हजारों लोग शहर में आ और जा रहे हैं, लेकिन कहीं भी बाहर से आने वाले लोगों की जांच नहीं की जा रही। इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा है।
बॉर्डर पर चेकिंग के लिए शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा
^मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हम रिजर्व बेड की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। बाजारों एवं भीड़ भरे क्षेत्रों में मास्क-डिस्टेंस के नियमों की सख्ती भी करेंगे। बॉर्डर पर चेकिंग के लिए शासन स्तर पर चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा। - कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर