अस्पताल काे बनाने के लिए ग्रुप तैयार मार्क हॉस्पिटल काे अधूरा छाेड़ने वाला ग्रुप ही इसे फिर बनाने काे तैयार, कलेक्टर काे भेजा प्रस्ताव
21 साल पहले गाेला का मंदिर चाैराहा स्थित जिस मार्क हाॅस्पिटल का काम हाॅटलाइन ग्रुप ने अधूरा छाेड़ दिया था, अब फिर से इस अस्पताल काे बनाने के लिए ग्रुप तैयार है। ग्रुप ने कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को पत्र भेजकर इसे बनाने के लिए अनुमति मांगी है। कलेक्टर इस पत्र को लेकर राज्य शासन से मार्गदर्शन मांगेंगे।
गौरतलब है कि वर्ष 2000 में इस हॉस्पिटल को तैयार करने का अनुबंध प्रदेश सरकार और हॉटलाइन ग्रुप के बीच हुआ था, लेकिन ग्रुप ने वित्तीय घाटे को देखते हुए ये काम पूरा नहीं किया। शहर में उपनगर मुरार, ग्वालियर और ग्रामीण क्षेत्र की साढ़े चार लाख आबादी के बीच मुरार का जिला अस्पताल व हजीरा का सिविल अस्पताल है। इनमें 140 बिस्तर हैं। इस कारण यहां से मरीजाें काे जेएएच रैफर किया जाता है। गोले का मंदिर पर अस्पताल बनने से जेएएच पर दबाव कम होगा।
प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है
मार्क हॉस्पिटल बनाने के लिए हाॅटलाइन ग्रुप ने पत्र भेजकर इच्छा जाहिर की है। अभी उनके पत्र को राज्य सरकार के पास भेजा जा रहा है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद ग्रुप प्रबंधन से चर्चा की जाएगी।
- कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
माधवराव सिंधिया का 25 साल पुराना सपना, हर बार अटका प्राेजेक्ट
तत्कालीन केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया ने 1986 में 20 एकड़ जमीन का आवंटन अस्पताल के लिए कराया था। 10 जून 1989 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इंदिरा गांधी अस्पताल के लिए शिलान्यास किया था, लेकिन पैसे न हाेने से ये प्रोजेक्ट अटक गया।
2000 में ये जमीन हॉटलाइन इंडस्ट्रीज ग्रुप को दे दी गई। ग्रुप ने तब काम भी शुरू किया। कुछ हिस्से पर स्ट्रक्चर खड़ा भी कर दिया गया, लेकिन ग्रुप जब घाटे में गया ताे मालनपुर में इंडस्ट्रीज बंद होने के साथ अस्पताल का भी काम भी राेक दिया गया।
तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2002 में दिल्ली के एस्कॉर्ट हॉस्पिटल से इस अस्पताल काे बनाने व संचालित करने के लिए एमओयू पर चर्चा शुरू की गई।
2003 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने पर इस एमओयू में दिलचस्पी नहीं ली गई और प्रोजेक्ट फिर से थम गया। कुछ साल पहले प्रदेश सरकार ने महिला एवं बाल विकास व दूसरे विभागों को जमीन का आवंटन कर दिया था।