महात्मा गांधी और बाबा साहेब की प्रतिमा को किनारे किया गया, मूर्तियों के शिफ्टिंग पर भड़की कांग्रेस
नई दिल्ली. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को संसद भवन परिसर में प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया। जिसमें देश के मकान नेताओं की मूर्तियों को नयी जगह पर स्थापित किया गया है। विपक्ष ने इस पर आपत्ति जताई है और इसे लोकतंत्र की मूल भावना का उल्लघंन बताया है। प्रेरणास्थल के उद्घाटन के अवसर पर उपराष्ट्रपति के साथ 17वीं लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला, केन्द्रीय मंत्री रिजिजू, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायणसिंह और केन्द्रीय अश्विनी वैष्णव, अर्जुन राम मेघवाल और एल मुरूगन ने भी महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।
एक ही स्थल पर स्थापित की गयी मूर्तियां
संसद भवन परिसर के अन्दर देश के महान नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां स्थापित है। जिन्होंने भारत के इतिहास, सांस्कृतिक पुर्न जागरण और स्वंतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह मूर्तियां परिसर में अलग जगहों पर स्थित थी। जिससे यहां आने वाले लोगों के लिये इन्हें ठीक से देखने मुश्किल हो गया था। इन मूर्तियों को संसद भवन परिसर के भीतर एक ही स्थल पर स्थापित करने के उद्देश्य से प्रेरणा स्थल का निर्माण किया गया है। ताकि संसद भवन परिसर में आने वाले गणमान्य नागरिक ओर अन्य लोग भी इन मूतियों को एक ही जगह पर सुविधाजनक रूप से देख सकें और श्रद्धांजलि अर्पित कर सके।
कांग्रेस ने जताई आपत्ति
विपक्ष ने इस नये निर्माण पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट कर कहा है कि संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी और डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर सहित कई महान नेताओं की मूर्तियों को उनके प्रमुख स्थानों से हटाकर एक अलग कोने में स्थापित कर दिया गया है। बिना किसी सलाह के मनमाने ढंग से इन मूर्तियों को हटाना हमारे लोकतंत्र की मूल भावना का उल्लघंन है।