क्‍या करें, क्‍या न करें MP के BJP विधायक, नए CM चुनने से पहले भाजपा आलाकमान ने जारी किया निर्देश

(प्रशांत कटारे), भोपाल. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर असमंजस बना हुआ है. इस बीच विधायक दल की बैठक से पहले बीजेपी ने विधायकों को निर्देश जारी किया है. बीजेपी ने विधायकों से कहा है कि विधायक दल की बैठक से पहले मुख्यमंत्री के नाम पर मीडिया से बोलने से बचें. पार्टी ने सभी विधायकों को 1 बुलाया भाजपा कार्यालय बुलाया है. यहां 1 से 3 बजे तक पंजीयन और सामूहिक भोज का कार्यक्रम है. भोज के बाद सभी विधायकों का सामूहिक फोटो सेशन होगा. इसके बाद पर्यवेक्षको की उपस्थिति में विधायक दल की बैठक होगी. यह बैठक शाम 4 बजे शुरू होगी.

बता दें, विधायक दल की बैठक के लिए केन्द्रीय पर्यवेक्षक मनोहरलाल खट्टर, आशा लाकड़ा, के. लक्ष्मण आज भोपाल आएंगे. वे विधायक दल की बैठक से पहले विधायकों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे. विधायक दल की बैठक में नेता का नाम ऐलान होते ही मुख्यमंत्री के नाम पर बना सस्पेंस खत्म हो जाएगा. चुनाव जीते सभी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सरकार में शामिल होंगे. गौरतलब है कि, बीजेपी ने 17 नवंबर को हुए चुनाव में 230 सदस्यीय विधानसभा में 163 सीट जीतकर मध्य प्रदेश में सत्ता बरकरार रखी. जबकि, कांग्रेस 66 सीट के साथ दूसरे स्थान पर रही. बीजेपी ने चुनाव में मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर किसी को पेश नहीं किया था और एक तरह से पूरा प्रचार अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर टिका था.

एक विधायक ने कहा कि बैठक सोमवार शाम यानी 11 दिसंबर को चार बजे शुरू होने की उम्मीद है और शाम सात बजे तक मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा हो सकती है. इस बार, बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश किए बिना विधानसभा चुनाव लड़ा. चौहान चार बार के मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने 2005, 2008, 2013 और 2020 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. चौहान की तरह ओबीसी समुदाय के प्रह्लाद पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिमनी के नवनिर्वाचित विधायक नरेंद्र तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, राज्य इकाई के प्रमुख वीडी शर्मा और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं.

वर्ष 2003 के बाद से, मध्य प्रदेश में बीजेपी के सभी तीन मुख्यमंत्री, उमा भारती, बाबूलाल गौर और चौहान, अन्य पिछड़ा वर्ग से रहे हैं. मध्य प्रदेश में ओबीसी की आबादी करीब 48 फीसदी है. पटेल, तोमर, विजयवर्गीय, शर्मा और सिंधिया पहले ही नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकार अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं. उन्होंने पार्टी अध्यक्ष जे.पी.नड्डा से भी मुलाकात की. वर्ष 2004 के बाद से यह तीसरी बार है, जब बीजेपी ने मध्य प्रदेश में केंद्रीय पर्यवेक्षक भेजे हैं. अगस्त 2004 में, जब उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, तो पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रमोद महाजन और अरुण जेटली को राज्य में केंद्रीय पर्यवेक्षकों के रूप में भेजा गया था. नवंबर 2005 में, जब बाबूलाल गौर ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, तो नया मुख्यमंत्री चुनने में विधायकों की मदद करने के लिए राजनाथ सिंह को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में भेजा गया था. उस वक्त शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल का नेता चुना गया था.