चीन में फिर फैली रहस्यमय बीमारी, भारत ने तत्काल जांच पर दिया जोर, कोविड पैनल चीफ ने चेताया- देरी न करे दुनिया
नई दिल्ली. केंद्र के कोविड पैनल के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा (NK Arora) ने न्यूज18 को बताया कि कोविड-19 (Covid-19) के प्रकोप से महत्वपूर्ण सबक को देखते हुए चीन के लिए यह जरूरी है कि वह किसी भी अस्पष्ट बीमारी के कारणों की तुरंत जांच करे और उसके बारे में दुनिया को जानकारी दे. टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) के प्रमुख डॉ. अरोड़ा के मुताबिक बीमारी के बारे में अगर स्वतंत्र सत्यापन चीन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होता है, तो उसको तुरंत अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जांच करनी चाहिए. एनटीएजीआई भारत में कोविड-19 टीकों के उपयोग के बारे में महत्वपूर्ण फैसले लेता है.
चीन में हाल ही में अस्पष्ट निमोनिया जैसी बीमारी के मामलों में तेज बढ़ोतरी के कारण अस्पतालों में भारी संख्या में मरीज भर्ती हो रहे हैं. इस हफ्ते की शुरुआत में एक ऑनलाइन मेडिकल कम्युनिटी प्रोमेड (ProMED) ने उत्तरी चीन में बच्चों में अज्ञात निमोनिया के बढ़ते सामूहिक मामलों की कई मीडिया रिपोर्टों पर गौर किया. प्रोमेड संस्था ने ही 2019 के अंत में वुहान में फैल रही एक अज्ञात बीमारी के बारे में सवाल उठाए थे, जो बाद में कोविड-19 बनकर दुनिया के सामने आई. दुनिया चीन में उभरती स्थिति पर करीब से नजर रख रही है, जो बिल्कुल उसी तरह सामने आ रही है जैसे कि कोविड-19 महामारी पहली बार अस्पष्ट निमोनिया जैसी बीमारी के साथ शुरू हुई थी.
‘कोविड से मिली सीख बेकार नहीं जानी चाहिए’
डॉ. अरोड़ा ने News18 को बताया कि दुनिया को उम्मीद है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन इस मामले को मजबूती से आगे बढ़ाएगा. विश्व स्वास्थ्य संगठन इस प्रकोप के कारणों की तुरंत पहचान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रेरित करने के लिए आगे बढ़ेगा. अरोड़ा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी को खासकर दो पहलुओं- प्रकोप से निपटना और जांच से निकलने वाले परिणामों को साझा करने के संबंध में अधिक पारदर्शिता पर जोर देना चाहिए. अरोड़ा ने कहा कि इस पोस्ट-कोविड दुनिया में हर कोई समझ गया है कि राष्ट्रीय सीमाएं अर्थहीन हैं. इसलिए अगर किसी रोगजनक में महामारी की संभावना है तो तत्काल कार्रवाई से जान बचाई जा सकती है.