ग्वालियर बनी अब संगीत नगरी, यूनेस्को ने दिया म्यूजिक सिटी का दर्जा

ग्वालियर. मध्यप्रदेश के ग्वालियर को संगीत नगरी ग्वालियर को यूनेस्को ने क्रियटिव सिटी म्यूजिक का दर्जा दे दिया है। ग्वालियरवासियों समेत राज्य के लोगों के लिये यह गौरवान्वित करने वाली खुश खबरी मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर प्राप्त हुआ है। यूनेस्को ने क्रियटिव सिटी नेटवर्क में देश के 2 शहरों को चयन किया थाि। क्रियटिव सिटी में केरल के कोझिकोड की दावेदारी लिटरेचर सिटी की थी। वहीं, ग्वालियर की दावेदारी संगीतधानी यानी म्यूजिक सिटी की रहीं। यूनेस्को ने ग्वालियर को क्रियटिव सिटी म्यूजिक का दर्जा दे दिया है।

म्यूजिक की ब्रांडिंग में संजय धूपर भी
शहर में संगीत को चौराहा पर लाने के लिये रफी के गीत के माध्यम से ग्वालियर के जाने माने और वर्ल्ड रिकॉर्ड हासिल करने वाले सिंगर संजय धूपर ने काफी मेहनत की थी। ग्वालियर को म्यूजिक सिटी का दर्जा दिलाने के लिये ग्वालियर के बैजाताल, महाराज बाड़ा और ग्वालियर के किले पर संगीत के कार्यक्रम आयोजित किये । आपको बता दें कि यह सभी कार्यक्रम निःशुल्क किये थे।

1 जनवरी 2020 – से 31 अक्टूबर 2023
प्रमुख – वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया लगातार 12 घंटे गायन रफ़ी साहेब के गीतों का 31 जुलाई 2022, बैजाताल
1) बैजाताल (ग्वालियर) – 73
2) ग्वालियर व्यापार मेला – 9
3) शिल्प मेला – 7
4) मेला ग्राउंड (माननीय मुख्यमंत्री सम्मेलन ) – 2
5) इंदरगंज चोराहा – 1 (माननीय मुख्यमंत्री रोड शो )
6) बाल भवन – 2 (राज्य सरकार)
7 ) महाराज बाड़ा – 9
8) कटोरा ताल – 3
9) इटालियन गार्डन – 1
10) ग्वालियर फोर्ट – 1
11) बेहट – 3
12) टेकनपुर – 1
13) डबरा – 9
14) शिवपुरी – 2
15) शिवपुरी जेल – 1
16) ग्वालियर जेल – 1
17) भिंड – 1
18) गोहद – 1
पहले से ही संगीत नगरी इसलिये किया है दावा
यूनेस्को के सामने ग्वालियर का दावा सबसे मजबूत इसलिये रहा है ग्वालियर में पहले से ही संगीत सम्राट तानसेन की जन्मस्थली और इतिहास है। तानसेन ही ध्रुपद के जनक रहे हैं। ग्वालियर के राजा मानसिंह ने ही ध्रुपद धमार की रचना भी की थी। इनके साथ ही शहर ने कई बड़े संगीतज्ञ भी दिये। बैजू बावरा, हस्सू हद्सू खां भी ग्वालियर से ही है।