पीएचई घोटाला में, 18 करोड़ रुपए गबन के मामले में 50 दिन बाद एफआईआर
ग्वालियर. लगभग 50 दिन बाद गुरुवार को पीएचई में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले में जांच रिपोर्ट के आधार पर 74 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई। वरिष्ठ कोषालय अधिकारी अरविंद शर्मा की रिपोर्ट पर क्राइम ब्रांच ने सभी आरोपियों के नाम पुरानी एफआईआर में ही शामिल कर लिए हैं। 5 साल में हुए इस घोटाले के दौरान जो सात अफसर तैनात रहे हैं उनके नाम भी आरोपी के रूप में पुलिस को सौंप दिए गए हैं।पीएचई में हुई घोटाले की जांच 27 जुलाई को प्रारंभ हुई थी।
गुरुवार रात अफसरों के दखल पर एफआईआर दर्ज कराई गई
जांच टीम ने रिपोर्ट 23 अगस्त को तैयार कर विभागीय अफसरों को सौंपी। इसमें कुल 18 करोड़ 92 लाख 25 हजार 399 रुपए का गलत खातों में भुगतान होने की पुष्टि की। इसके बाद कलेक्टर की मंजूरी मिलते ही गुरुवार रात कोषालय के वरिष्ठ अफसरों के दखल पर एफआईआर दर्ज कराई गई। रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि कुल 81 खातों में गलत भुगतान हुआ है, इनके खातेदारों की संख्या 65 है। मुख्यालय ने 71 खातों में 16 करोड़ 42 लाख 13 हजार 853 रुपए की गड़बड़ी पकड़ते हुए जांच के निर्देश दिए थे।
65 अन्य खातेदारों के नाम भी एफआईआर में लिखवाए
जांच रिपोर्ट में 2 अगस्त 2018 से लेकर जांच होने तक 7 कार्यपालन यंत्री संधारण खंड-1 में पदस्थ होना बताया है। इनमें आरएन करहिया, अनूप चौधरी, वीके छारी, जागेश श्रीवास्तव, एमके उमरैया, राकेश राहोरा, संजय सिंह सोलंकी का नाम शामिल है। इसके अलावा कर्मचारी अशोक कचौरिया और हीरालाल के साथ 65 अन्य खातेदारों के नाम भी एफआईआर में लिखवाए गए हैं।
जांच में मुख्य रूप से यह मिली हैं गड़बड़ी
मृत और लापता कर्मचारियों के एम्पलाई कोड में बैंक डिटेल बदलकर फर्जी खातों में पैसा डाला।
मई 2017 से अगस्त 2018 तक वेतन एफवीसी प्रकार से भुगतान के बावजूद कई कर्मचारियों के वेतन उनके एम्प्लाई कोड में खाता बदलकर भुगतान।
कोर्ट केस एरियर के नाम से कर्मचारियों के नाम और खाते बदले गए। कई को 5 बार तक भुगतान हुआ।
अभिभाषक फीस के नाम पर भी कुछ संदिग्ध खातों में भुगतान हुआ।
सबसे बड़ा कारण डीडीओ द्वारा अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर एम्पलाई कोड में नाम और बैंक खाते परिवर्तित करना।
जांच में अभी बिल बनाने वालों के नाम शामिल किए जाएंगे
पीएचई घोटाले के मामले में ट्रेजरी की जांच रिपोर्ट के आधार पर खाता धारकों के अलावा 7 कार्यपालन यंत्रियों के नाम बढ़ाए गए हैं। जांच में अभी बिल बनाने वालों के नाम भी शामिल किए जाएंगे।
ऋषिकेश मीणा, एएसपी