जेल प्रबंधन ने बिना मुहूर्त के राखी बंधवाई, भाईयों को तिलक करते ही बहनों के छलके आंखों से आंसू
ग्वालियर. केन्द्रीय जेल में अशुभ मुहूर्त में ही बहनों ने अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधी। रक्षाबंधन के मौके पर बुधवार की सुबह जेल के बाहर बहनों का जमावड़ा लगा रहा। दूर-दूर से बहनें अपने कैदी भाईयों को रक्षासूत्र बांधने के लिये केन्द्रीय जेल पहुंची। कई दिनों के बाद जेल में बन्द भाईयों से मिलकर और माथे पर तिलक करते हुए बहन-भाई के आंखों से आंसू छलक आये। जेल मेंबने लड्डू से बहन और भाईयों ने एक -दूसरे का मुंह मीठा कराया है। जेल प्रशासन ने बाहर से कोई भी मिठाई अन्दर नहीं लाने दी है। जेल प्रबंधन ने बंदी भाईयों को राखी बांधने आने वाली बहनों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो इसके लिये खुली जेल मैदान में टेंट लगाकर रक्षाबंधन पर भाई और बहन की मुलाकात कराई है। दोपहर 3 बजे तक 20 हजार से अधिक बहनें जेल पहुंच चुकी थी।
3 जगह हुई महिलाओं की चैकिंग
केन्द्रीय जेल में महिलाओं से किसी भी प्रकार सामग्री अन्दर नहीं ले जा सके इसके लिये 3 जगह पर चैकिंग की व्यवस्था की गयी थी। जेल में सिर्फ महिलाओं को प्रवेश मिल रहा था। वहीं पुरूषों का प्रवेश निषेध था। मिलाई के लिये जेल मैदान में टेंट लगाया गया है जहां पर बैठकर बहने अपने भाईयों को राखी बांध सके।
जेल में ही कैदियों ने बनाया पक्का खाना
जेल में सजा काट रहे बंदियों के लिये जेल प्रबंधन ने पक्के खाने की व्यवस्था की और कैदियों के लिये पूडी-सब्जी के साथ ही खीर बनाई गयी। यह खाना जेल में बंद अन्य कैदियों ने ही बनाया था। रक्षा बंधन पर जब बहन तिलक करेंगे तो उसके लिये लड्डू बनाये गये थे जो बहनों को जेल परिसर से ही खरीदने पड़े।
महिला बन्दियों ने बनाई राखी
इस बार जेल प्रबंधन ने इस बार राखी नहीं रखवाने की योजना बनाई। महिला बंदियों ने जेल से बन्द पुरूष बंदियों को राखी बांधी है जिससे जेल में सजा काट रही महिला बंदियों को त्योहार फीका नहीं रहा है और इसके लिये जंेल प्रबंधन ने एनजीओ और पुरूष बंदियों को राखी बंधवाने की व्यवस्था की गयी थी।