ग्वालियर में हादसे रोकने की तैयारी, 15 चौराहों पर बनेंगे ज्यादा चौड़े ब्रेकर जेब्रा क्रॉसिंग की तरह भी होंगे इस्तेमाल
ग्वालियर. मेन रोड नंबर 1 के शिवाजी नगर चौराहे पर हाल में हुए एक्सीडेंट की वजह वहां बना हुआ डायगोनल स्पीड ब्रेकर है। ऐसे हादसे न हों इसके लिए स्पीड ब्रेकर को गाड़ी की दिशा के परपेंडिकुलर बनाया जाना चाहिए। गाड़ी की स्पीड को कम करने के लिए स्लोप सी रखें कि दोनों टायर एक साथ चलें और उसकी हाइट फुटपाथ के बराबर करके चौड़ाई इतनी बढ़ा दी जाए कि इसका उपयोग जेब्रा क्राॅसिंग की तरह हो जाए। इसके लिए स्पीड ब्रेकर से पहले स्टॉप लाइन बनाना होगी और रेड सिग्नल के समय गाड़ियों को यहां रुकना होगा। यूरोप के कई देशों में टेबल टॉप ब्रेकर और क्रासिंग का यह प्रयोग काफी सफल है। इसे बनाने में इस तरह के मटेरियल का उपयोग होता है जिसमें सरफेस रफ हो तो ड्राइवर गाड़ी को धीमा करते हैं।
स्लोप ऐसी होती है कि गाड़ी की स्पीड एकदम से कम नहीं होती। इसके साथ ही फुटपाथ के बराबर हाइट पर और गाड़ियों के परपेंडिकुलर जेब्रा क्रासिंग पैदल यात्रियों के लिए सुविधाजनक होती है और वे इसका पालन भी करते हैं। डायगोनल क्राॅसिंग पर लोग इसका पालन नहीं करते, क्योंकि उन्हें सड़क पार करने में समय अधिक लगता है।
पिछले दिनों हुए एक्सीडेंट के बाद हमने शिवाजी नगर समेत कुछ अन्य चौराहों की ज्योमेट्री का अध्ययन किया। इसके बाद हमने जिला प्रशासन और पुलिस ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीटीआरआई) को शहर के प्रमुख चौराहों की नए सिरे से डिजाइन देने को कहा है। प्रशासन नगर निगम और पीडब्ल्यूडी से समन्वय कर उसे लागू कराएगा।
शिवाजी नगर सहित मेन रोड 1 के हर चौराहे पर डिवाइडर भी गाड़ियों के मूवमेंट के हिसाब से बनाना होगा। इसे सीधी लाइन में बनाने की बजाय ऐसा डिफ्लेक्शन रखना होगा जिससे एंट्री के समय गाड़ी को कम जगह मिले और एक्जिट के समय ज्यादा। इससे ट्रैफिक एक दिशा में चलेगा और सिग्नल टाइमिंग का भी पूरा उपयोग होगा।
इन चौराहों की डिजाइन कर रहे तैयार
लालघाटी, रेतघाट, मोती मस्जिद, रोशनपुरा, टीटी नगर थाना, प्लेटिनम प्लाजा, माता मंदिर सहित 15 चौराहे।