एक शाम अटल जी के नाम-राधा पुकारेगी तो घनश्याम आयेगा -कुमार विश्वास

ग्वालियर. ठिठुरन भरी सर्दरात, लेकिन लोगों में उतना ही अधिक उत्साह कवि के हर एक मुक्तक पर हजारों की तादाद में उपस्थित लोगों ने तालियों से उनका अभिवादन किया। मौका था पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटलबिहारी बाजपेई के 98वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में जीवाजी विश्वविद्यालय के खेल परिसर में ‘‘एक शाम अटल जी के नाम’’ का। अटल स्मृति मंच की तरफ से किये गये कवि सम्मेलन में देशभर से कवि आये ।
देश के प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि आप लोगों का सौभाग्य है कि आपने अअटल जी को इन गलियों में देखा है। मुझे नहीं लगता है कि युवाओं में किसी दिवंगत नेता के प्रति इदतना क्रेज है, जितना हमारे हीरो और प्यारे अटल जी के प्रति है। अटलजी एक समुद्र थे। अटलजी ने यही सिखाया कोई कुछ भी कह दें कुछ भी कर ले। उसके बाद भी अपनी मुस्कराहट जिन्दा रखियेगा शुरूआत करता हूं सुनियेगा।

तुम्हारा नाम आयेगा
मेरे जीने में मरने में तुम्हारा नाम आयेगा, मैं सांसें रोक लू फिर भी यही इलजाम आयेगा हर एक धड़कन में तुम हो तो फिर अपराध क्या मेरा, अगर राधा पुकारेगी तो फिर घनश्याम आयेगा।
चम्बल के व्यक्ति की खासयित है, अगर सरकार यहां के व्यक्ति से पूछे कि पद्मश्री चाहिये या लायसेंस तो वह हेगा लायसेंस दिला दो साहब। कप्तान साहब बैठे हैं, चम्बल की वह पुलिस है जो मरे हुए निर्भय को तीन-तीन बार मार देती है।