भारत के 49वें प्रधान न्यायाधीश बने जस्टिस उदय उमेश ललित, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ


नई दिल्लीः न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में राष्ट्रपति भवन में भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. वह भारत के 49वें प्रधान न्यायाधीश हैं. जस्टिस एनवी रमण का सीजेआई के रूप में कार्यकाल 26 अगस्त को समाप्त हो गया था. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस ललित को सीजेआई पद की शपथ दिलाई. इस दौरान राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे.

देश के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में वह सिर्फ 74 दिन के लिए सर्वोच्च अदालत की कमान संभालेंगे. सीजेआई के रूप में जस्टिस यूयू ललित सुप्रीम कोर्ट की उस कॉलेजियम का नेतृत्व करेंगे, जिसमें जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस हिमा कौल, जस्टिस एस. अब्दुल नजीर और जस्टिस इंदिरा बनर्जी शामिल होंगी. जस्टिस बनर्जी के 23 सितंबर को रिटायर होने के साथ ही जस्टिस केएम जोसेफ कॉलेजियम में प्रवेश करेंगे. जस्टिस यूयू ललित 8 नवंबर को सीजेआई के रूप में रिटायर होंगे.
अपने शांत व सरल स्वभाव के लिए जाने जाते हैं जस्टिस ललित
पूर्व सीजेआई जस्टिस एनवी रमण अपने 16 माह के कार्यकाल में जहां 29 भाषणों और दर्जनों टिप्पणियों के जरिए हमेशा चर्चा में रहे, वहीं जस्टिस यूयू अदालत से बाहर सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी बेहद कम टिप्पणियां करते हैं. यहां तक की अदालत में भी उनकी गिनी चुनी 1 या 2 टिप्पणियां ही सामने आई हैं. जस्टिस ललित शांत रहकर अपना काम करते हैं. न्याय के प्रति सम्मान बना रहे इसके लिए उन्होंने दर्जनों महत्वपूर्ण केसों की सुनवाई से दूर होने में एक पल भी नहीं लगाया. ऐतिहासिक अयोध्या.बाबरी केस की सुनवाई से भी उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था.