DRDE ने कोविड़-19 के संक्रमण से बचाव के लिये सेनेटाइजर, एन-95 मास्क और पीपीई किट अनुसंधान में अग्रणी भूमिका, महाराजपुरा में सीएआरबीडी लैब बनेगी

ग्‍वालियर रक्षा अनुसंधान एवं विकास स्थापना (DRDE) द्वारा 17 दिसंबर 2021 (शुक्रवार) को ‘रक्षा उत्पाद प्रदर्शनी’ लगायी गयी। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत मनाये जा रहे रक्षा मंत्रालय आइकॉनिक सप्ताह के अंतर्गत इस प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था।

डीआरडीई सेनेटाइज़र, एन-95 मास्क एवं पी.पी.ई. किट के अनुसंधान में अग्रणी भूमिका निभायी
उद्घाटन समारोह में प्रदर्शनी के संयोजक डॉ. एके गोयल ने प्रदर्शनी की रूपरेखा एवं उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए डीआरडीई (DRDE) ग्वालियर के निदेशक डॉ. मनमोहन परीडा ने आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत रक्षा मंत्रालय एवं डीआरडीओ (DRDE) ने देश के विभिन्न स्थानों पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ‘आत्मनिर्भर भारत’ की झलक दिखाना भी है। प्रधानमंत्री के नारे ‘जय जवान जय किसान जय विज्ञान जय अनुसंधान’ की महत्ता प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि आने वाला दौर विशेष रूप से चुनौतियों से भरा होने वाला है, जिसका सामना करने में अनुसंधान की महत्त्वपूर्ण भूमिका रहेगी। आपने आत्मनिर्भर भारत में डीआरडीई (DRDE) ग्वालियर के योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि डीआरडीई (DRDE) ने विकसित अनेक उत्पादों से न सिर्फ बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत हुई है बल्कि भारत अब एक बड़े निर्यातक के रूप में सामने आया है। कोरोना काल में डीआरडीई (DRDE) ने सेनेटाइज़र, एन-95 मास्क एवं पी.पी.ई. किट के अनुसंधान एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभायी गयी है।

उच्च जोखिम वाले रोगजनक सूक्ष्मजीवों पर अनुसंधान, (CARBD) प्रयोगशाला की स्थापना होगी
उन्होंने बताया कि हाल ही में डीआरडीई (DRDE) ग्वालियर ने विकसित कैमिकल एजेंट डिटेक्टर (CAD) की प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के द्वारा एलएण्डटी (L&T) डिफेंस को किया गया है। इसके अलावा निकट भविष्य में डीआरडीई (DRDE) ने उच्च जोखिम वाले रोगजनक सूक्ष्मजीवों पर अनुसंधान करने के लिए ग्वालियर में ही उन्नत जैव रक्षा अनुसंधान केन्द्र (CARBD) नामक प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है, जो अपने आप में देश की एकमात्र प्रयोगशाला होगी। यह प्रयोगशाला की जैविक रक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।

उच्च जोखिम वाले रोगजनक सूक्ष्मजीवों पर अनुसंधान, (CARBD) प्रयोगशाला की स्थापना होगी
उन्होंने बताया कि हाल ही में डीआरडीई (DRDE) ग्वालियर ने विकसित कैमिकल एजेंट डिटेक्टर (CAD) की प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के द्वारा एलएण्डटी (L&T) डिफेंस को किया गया है। इसके अलावा निकट भविष्य में डीआरडीई (DRDE) ने उच्च जोखिम वाले रोगजनक सूक्ष्मजीवों पर अनुसंधान करने के लिए ग्वालियर में ही उन्नत जैव रक्षा अनुसंधान केन्द्र (CARBD) नामक प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है, जो अपने आप में देश की एकमात्र प्रयोगशाला होगी। यह प्रयोगशाला की जैविक रक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।

जैविक एवं रासायनिक युद्धक अभिकारकों की पहचान
इस प्रदर्शनी में डीआरडीई (DRDE) ग्‍वालियर द्वारा जैविक एवं रासायनिक युद्धक अभिकारकों की पहचान हेतु विकसित विभिन्‍न उत्‍पाद भी प्रदर्शित किए गये जो विद्यार्थियों एवं आगंतुकों के मध्‍य कौतूहल का विषय रहे। प्रदर्शनी अवधि के दौरान छात्र-छात्राओं ने डी.आर.डी.ई. के वैज्ञानिकों से विभिन्न वैज्ञानिक उत्पादों एवं विषयों के बारे में विस्तार से चर्चा की।
इस अवसर पर डीआरडीई (DRDE) के वरिष्‍ठ वैज्ञानिक डॉ. आरसी शर्मा, डॉ. के गणेशन, डॉ. एके गुप्ता के साथ-साथ आयोजन के नोडल अधिकारी डॉ. मुकेश शर्मा एवं अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक मौजूद थे। सत्र का संचालन डॉ. परितोष मालवीय ने किया।