'चारधाम यात्रा से रोक हटाइए योर ऑनर', उत्तराखण्ड सरकार की मिन्नत पर हाईकोर्ट ने कहा, 'मजबूरी है'

नैनीताल. अदालत द्वारा लगाई गई रोक को हटाकर चारधाम यात्रा शुरू करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने हाई कोर्ट में बड़ी मिन्नत से प्रार्थना की, लेकिन सरकार की इस गुज़ारिश को कबूल करने से उच्च न्यायालय ने इनकार कर दिया. दरअसल मंगलवार को सरकार से महाधिवक्ता व मुख्य स्थाई अधिवक्ता चन्द्र शेखर जोशी ने कोर्ट को बताया चूंकि सभी सेक्टर खुलने लगे हैं और चारधाम यात्रा बंद होने के चलते स्थानीय लोगों को खासा नुकसान हो रहा है. इस पर कोर्ट ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट में याचिका पेंडिंग है, तब तक हाईकोर्ट कोई निर्णय नहीं ले सकता.

सरकार की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि चारधाम यात्रा बंद होने से हजारों स्थानीय लोगों की रोजी रोटी प्रभावित हो रही है. डांडी, कांठी से लेकर खच्चर, होटल, रेस्टोरेंट समेत अन्य छोटे बड़े कारोबारों पर असर पड़ रहा है. लिहाज़ा रोक को हटाया जाए ताकि लोगों राहत मिले. लेकिन कानूनी प्रोसीजर का हवाला देकर हाई कोर्ट ने इस तरह का आदेश देने में असमर्थता ज़ाहिर की.

क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट से वापस लेगी याचिका?

मामला यह है कि 28 जून को हाई कोर्ट ने चारधाम यात्रा पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने माना था कि चारधाम यात्रा वाले ज़िलों में कोविड संबंधी व अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है. डॉक्टरों और 108 समेत अन्य सुविधाओं की कमी की ज़िला प्रशासन की रिपोर्ट का हवाला कोर्ट ने दिया था. तब हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सरकार ने 6 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की थी, जिस पर अभी सुनवाई बाकी है. सूत्र बता रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार एसएलपी वापस ले सकती है, जिसके बाद हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल कर रोक हटाने की मांग फिर की जाएगी.