र नहीं की खामियां स्वच्छता का मुकाबला हुआ और कठिन

ग्वालियर। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 की गाइड लाइन जारी कर दी। पिछले साल की तुलना में इस बार मुकाबला और कड़ा कर दिया है। इस बार दो बड़े बदलाव किए हैं। रैंकिंग 4 हजार के बजाय 5 हजार अंकों से होगी तथा ओवरऑल रैंकिंग के भी अंक जोड़े जाएंगे। इस बार भी यह प्रतियोगिता 4203 शहरों के बीच होगी।

अब ग्वालियर शहर की यदि बात करें तो स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में जिन खामियों के कारण हम पिछड़कर 28वें नंबर पर आए थे, निगम प्रशासन ने उन्हें अब तक दूर नहीं किया है। समय रहते यदि खामियों को दूर नहीं किया गया तो रैंकिंग में फिर पिछड़ना तय है। निगमायुक्त विनोद शर्मा ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों को नई गाइड लाइन की प्रतिलिपियां देते हुए निर्देशित किया है कि वे हर बिन्दु को समझ लें और अभी से खामियों को दूर करने में जुट जाएं।

इस बार जो बड़ा बदलाव किया है उसके तहत सर्टिफिकेशन कैटेगरी में 1250 अंक निर्धारित किए हैं। इसमें 20 फीसदी अंक ओवरऑल रैंकिंग के हैं। यानि देश में जो शहर ओवरऑल पहले नंबर पर रहेगा उसे 20 फीसदी अंक मिलेंगे। रैंकिंग घटते जाने पर अंक कम होते जाएंगे। इसी कैटेगरी में 5 फीसदी अंक खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) के निर्धारित किए हैं। इसमें भी दो कैटेगरी बना दी हैं। ओडीएफ सिंगल प्लस और डबल प्लस। डबल प्लस होने पर ही 5 फीसदी अंक मिलेंगे।

डबल प्लस तब मिलेगा जब शहर के शौचालय साफ, सुथरे होने के साथ उनमें वेंटिलेशन हो, पानी, तौलियां, साबुन, जेन्ट्स-लेडीज के अलग-अलग शौचालय, सीवर लाइन से कनेक्टिविटी हो या सेप्टिंक टैंक निश्चित समय में खाली किया जाता हो। ग्वालियर शहर सर्टिफिकेशन कैटेगरी में पिछड़ सकता है क्योंकि यहां शौचालकों की स्थिति काफी खराब है और ओवरऑल रैंकिंग में हम 2017 में 27वें नंबर थे जबकि 2018 में 28वें नंबर पर जा पहुंचे थे।

डोर-टू-डोर गीला-सूखा कचरा कलेक्शन लाकर लैंडफिल साइट पर भेजना, कचरे से खाद बनाना, 100 किलोग्राम से ज्यादा कचरा उत्पादन स्थलों पर बल्क गार्बेज जनरेटर न होना, शौचालयों में पानी, बिजली के इंतजाम न होना, नवाचर, लैंडफिल साइट का बंद रहना, ठोस कचरा प्रबंधन। 2018 के सर्वेक्षण में फिसड्डी रहने में यह खामियां प्रमुख थीं। निगम ने इन खामियों को दूर करने अब तक ठोस कदम नहीं किया है।