वैक्सीनेशन में सोनिया गांधी का रायबरेली सबसे पीछे, अब तक 1% आबादी को भी नहीं लग सका टीका
रायबरेली. भारत की वीआईपी सीट में से शुमार कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के क्षेत्र रायबरेली में टीकाकरण (Covid-19 Vaccination) के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं. राज्य की जनसंख्या के आधार पर देखें तो रायबरेली जिले में वैक्सीनेशन रेट सबसे कम है. शायद देश के लिहाज से भी टीकाकरण दर के मामले में यह जिला सबसे नीचे है. क्षेत्र में रहने वाली 85 फीसदी आबादी ग्रामीण है. देश में 16 जनवरी से टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हो गया था.
आंकड़ों में समझें
करीब 39 लाख की आबादी वाले रायबरेली में अब तक केवल रायबरेली. भारत की वीआईपी सीट में से शुमार कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के क्षेत्र रायबरेली में टीकाकरण (Covid-19 Vaccination) के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं. राज्य की जनसंख्या के आधार पर देखें तो रायबरेली जिले में वैक्सीनेशन रेट सबसे कम है. शायद देश के लिहाज से भी टीकाकरण दर के मामले में यह जिला सबसे नीचे है. क्षेत्र में रहने वाली 85 फीसदी आबादी ग्रामीण है. देश में 16 जनवरी से टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हो गया था.
आंकड़ों में समझें
करीब 39 लाख की आबादी वाले रायबरेली में अब तक केवल 2.12 लाख डोज दिए गए हैं. इनमें से 1.81 लाख पहले डोज हैं. इस लिहाज से जिले की केवल 4.6 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन मिली है. राज्य की टीकाकरण दर 9 फीसदी की तुलना में यह आंकड़ा लगभग आधा है. यहां दूसरा डोज पाने वालों की संख्या 32 हजार 263 है. इसका मतलब है कि अब तक एक प्रतिशत आबादी का भी पूरी तरह से टीकाकरण नहीं हो सका है.
इस दौरान न्यूज18 रायबरेली शहर के जिला अस्पताल में पहुंची. शुक्रवार सुबह 11 बजे मुश्किल से 20 लोग वैक्सीन लगवाने पहुंचे थे. यहां टीका लगवाने पहुंचे एक जोड़े से हमने बात की. 69 साल के दिनेश बहादुर ने बताया, 'हमें पहला डोज अप्रैल में मिला था और आज हमें दूसरा डोज मिल रहा है. वैक्सीन को लेकर यहां संकोच बहुत है... यहां तक कि कई लोगों ने हमें यहां आकर दूसरा डोज नहीं लेने के लिए कहा.' साथ में मौजूद 65 साल की ज्योतिमा सिंह ने याद किया कि कैसे उनकी बहन को दिल्ली के निजी अस्पताल में वैक्सीन लगवाने के लिए 900 रुपये खर्च करने पड़े. उन्होंने कहा, 'यहां यह मुफ्त है, तो क्यों नहीं लगवाना?'
रायबरेली के अमावा में स्थित समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भीड़ और भी कम थी. यहां 75 साल की गुलाबकली देवी अपने दूसरे डोज का इंतजार कर रही थीं, क्योंकि यहां का स्टाफ वायल खोलने से पहले और लोगों के आने का इंतजार कर रहा था, ताकि वेस्टेज कम से कम हो. उनके बेटे सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उनके गांव में लोग वैक्सीन लेने से बच रहे हैं. उन्होंने कहा, 'अगर लोगों को पहले डोज के बाद बुखार आ रहा है, तो वे दूसरों को हतोत्साहित कर रहे हैं. लेकिन मैंने अपने बुजुर्ग माता-पिता को टीका लगवा लिया है.' अपने फोन से दूसरा डोज प्राप्त करने के लिए लोगों को कॉल कर रही एक एक नर्स ने कहा, 'हमें लोगों को और खासतौर से 45 साल से ज्यादा उम्र वाले वर्ग को काफी प्रोत्साहित करना होगा.'
अपनी 24 साल की बेटी दीक्षा को वैक्सीन लगवाने पहुंचे वीरेंद्र सिंह राजनेताओं की तरफ से फैलाए गए कन्फ्यूजन को जिम्मेदार मानते हैं. उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव के यह कहने के बाद वे वैक्सीन नहीं लगवाएंगे, मेरे गांव में ज्यादातर मुस्लिम और यादव ने कहा है कि वे टीका नहीं लगवाएंगे.' हाल ही में कांग्रेस ने बताया है कि रायबरेली सांसद सोनिया गांधी को वैक्सीन के दोनों डोज लग गए हैं, लेकिन स्थानीय लोग इस बात को नहीं जानते. एक छात्र नितिन मोहन बताते हैं, 'हमने वैक्सीन लेते हुए उनकी तस्वीर नहीं देखी. गांधी वैक्सीन लेने के लिए रायबरेली के लोगों को एक अपील जारी कर सकती हैं. शायद इससे कुछ मदद मिले.'
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एनके श्रीवास्तव भी इस बात को स्वीकारते हैं कि स्थानीय लोगों में विरोध और कुछ भ्रांतियां हैं. वे कहते हैं, 'गांववाले वैक्सीन लेने से पहले आकर पूछते हैं कि क्या उन्हें टीका लगवाने के बाद तीन दिनों तक घर में रहना होगा. 18-44 आयुवर्ग को लेकर सोशल मीडिया पर जारी गलत जानकारी भी एक बड़ा मुद्दा है. हम लोगों की शंकाओं को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं.' रायबरेली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह कहते हैं कि शुरुआती परेशानियों के बाद अब हालात सुधर रहे हैं. उन्होंने कहा, '45 साल से ज्यादा वाले आयुवर्ग में कुछ संकोच था, लेकिन हालात अब बेहतर हो रहे हैं. जुलाई से हम टीकाकरण बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं.'
शुक्रवार को रायबरेली में केवल 3300 लोगों को वैक्सीन लगी. जिले की करीब 85 फीसदी ग्रामीण आबादी 4000 स्क्वायर किमी के दायरे में फैली है. इसके चलते भी जिले के 89 वैक्सीन सेंटर्स पर टीकाकरण एक चुनौती बना हुआ है.
इस दौरान अमावा समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार दोस्तों का एक समूह पहुंचा. उनमें से एक मिथिलेश सिंह ने बताया, 'जब लोग हमारे गांव में टेस्टिंग के लिए आए, तो स्थानीय लोग भागने लगे. ऐसे में वैक्सीन के लिए कुछ किमी का सफर तय करवाना एक बड़ा काम है. हम यहां आए हैं, क्योंकि हमें पता लगा है कि बगैर वैक्सीन के हम विदेश नहीं जा पाएंगे और हम कोविड के संपर्क में नहीं आना चाहते.' यहां मौजूद स्टाफ ने जानकारी दी कि 18-44 आयुवर्ग की तरफ से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है. रायबरेली में इस आयुवर्ग के 46 हजार लोगों को वैक्सीन लग चुकी है.