रूंझ नदी में मिले शवों का सच क्यों छुपाना चाहती है मध्य प्रदेश सरकार
मध्य प्रदेश की रूंझ नदी की यात्रा पन्ना जिले में ही समाप्त हो जाती है। केन की सहायक नदी है. केन नदी,यमुना में जाकर मिलती है और यमुना गंगा में मिल जाती है. रूंझ नदी में शवों का अंतिम संस्कार किए जाने की बड़ी वजह सिर्फ यही है कि अंत में उसका मिलन गंगा से होता है. गंगा की गोद में जाकर मृतक को मोझ मिल जाता है. नदी के किनारे बसे लोग इसी सोच के चलते शवों को रूंझ में बहा देते हैं कि वह बहकर गंगा में पहुंच जाएंगे. लेकिन, यह जरूरी नहीं कि हर शव की यात्रा गंगा में जाकर पूरी हो. रूंझ में आमतौर पर गर्मियों में बहाव कम हो जाता है. रूंझ में तैरते मिले शवों का सच तो सरकार स्वीकार कर रही है, लेकिन संख्या पर सहमत नहीं है. सरकार दो शव मिलने की बात कर रही है और ग्रामीण पांच-छह शव देखने की बात कर रहे हैं. सरकारी स्तर पर बाकी शवों के अस्तित्व को ही नकार दिया गया है. बिहार और उत्तरप्रदेश में नदियों में तैरते मिल रहे शवों के कारण वहां की सरकारों को कोरोना संक्रमण न रोक पाने के आरोप लग रहे हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कोशिश शवों की राजनीति से मध्यप्रदेश को अलग रखने की है. यही कारण है कि सरकार ने आनन-फानन मृतकों के परिजनों को भी खोज लिया। मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमण की दर पंद्रह प्रतिशत से अधिक है.