ग्वालियर की जर्जर सड़कों का हाईकोर्ट ने मांगा हिसाब, हाईकोर्ट स्वयं सैंपल टेस्ट के लिये खुदाई करायेगा

ग्वालियर. उखड़ी और गड्डों का आकार ले चुकी सड़कों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रूख अख्तियार किया है। सिर्फ कागजी दावों से काम नहीं चलेगा। बल्कि धरातल पर उतरकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पोल खोली जायेगी। हाईकोर्ट ने वर्ष 2021-2026 तक शहर की सड़कों पर लगे एक-एक सरकारी पैसे का हिसाब मांगा है। सीनियर एडवोकेट अवधेशसिंह तोमर की जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाइ्र करते हुए हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है। करोड़ों रूपये पानी की तरह बहाने के बाद भीस ड़कें जर्जर क्यों है। इसका जवाब अब अधिकारियों को देना होगा।
माना जा रहा है।
इस मामले में गुरूवार को फिर से सुनवाई होनी है। तब तक विभागों को मांगे गये दस्तावेज और रिकॉर्ड तैयार करने होंगे। हाईकोर्ट के इस कड़े रूख से नगरनिगम, पीडब्ल्यूडी और ठेकेदारों के सिंडिकेट में हडकंप मचा हुआ है।
5 साल के खर्च और मेजरमेंट बुक (MB) का हिसाब: साल 2021 से लेकर 2026 तक नगर निगम और संबंधित विभागों द्वारा सड़कों पर खर्च की गई पूरी रकम का रिकॉर्ड तलब किया है। निर्माण के समय बनाई गई ओरिजनल मेजरमेंट बुक्स भी कोर्ट में जमा करानी होंगी।
​सड़कों की खुदाई कर होगी सैंपलिंग: निर्माण की असली परत खोलने के लिए कोर्ट सड़कों की खुदाई कराएगा। यह देखा जाएगा कि तय मानकों (Thickness) के हिसाब से डामर, गिट्टी और कंक्रीट का इस्तेमाल हुआ है या सिर्फ लीपापोती की गई है।
​4 सदस्यीय स्वतंत्र कमेटी गठित: जांच निष्पक्ष रहे, इसके लिए 4 सदस्यों की एक स्पेशल कमेटी बनाई गई है, जिसमें एडवोकेट्स और टेक्निकल एक्सपर्ट्स शामिल हैं।
​नगर निगम अफसरों की ‘नो एंट्री’: निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कोर्ट ने आदेश दिया है कि जब सड़कों की खुदाई और जांच होगी, तब नगर निगम का कोई भी अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं रहेगा।
​NHAI और PWD भी लपेटे में: सिर्फ नगर निगम ही नहीं, बल्कि शहर की कनेक्टिविटी से जुड़े NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) और PWD को भी मामले में नया पक्षकार बनाने के निर्देश दिए गए हैं।