चम्बल के अवैध रेत उत्खनन की एसएएफ कंपनी ड्रोन कर रही है निगरानी

मुरैना. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद चम्बल नदी से अवैध रेत उत्खनन रोकने के लिये जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाये है। प्रशासन को 93 सदस्यीय एसएएफ की एक कम्पनी मिली है। चम्बल नदी के किनारे टेंट लगाकर 24 घंटे निगरानी और पेट्रोलिंग करेगी। इसके अलावा राजघाट पर निगरानी के लिये ड्रोन कैमरे भी छोड़े गये है। वर्तमान में मायनिंग, राजस्व, वन और पुलिस की टॉस्क फोर्स ने संयुक्त रूप से राजघाट समेत अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर गश्त शुरू की गयी है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मिली जवानों की कम्पनी
चम्बल नदी में अवैध रेत उत्खनन रोकने में विफलता पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान की सरकारों को फटकार लगायी थीं हाईकोर्ट ने रेत उत्खनन न रूकने पर अर्द्धसैनिक बल तैनात करने के निर्देश दिये थे। इसकेबाद जिला प्रशासन को एसएएफ के 93 जवानों की बटालियन मिली है। जिससे अलग-अलग जगहों पर तैनात किया गया है।
2 ड्रोन कैमरों से निगरानी, 4 विभागों की संयुक्त गश्त जारी
चंबल राजघाट पर बड़े स्तर पर रेत का उत्खनन किया जा रहा था। इसे रोकने के लिए बल तैनात करने के साथ-साथ प्रशासन ने 2 ड्रोन कैमरे भी लगाए हैं, जिनसे नजर रखी जा रही है। प्रशासन जल्द ही ड्रोन कैमरों की संख्या भी बढ़ाएगा। चंबल अभयारण्य देवरी के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान के अनुसार, वन, पुलिस और राजस्व विभाग की जिला टास्क फोर्स संयुक्त रूप से सभी पॉइंट पर पहुंचकर निगरानी कर रही है। चंबल नदी किनारे और राजघाट पर संयुक्त गश्त जारी है। फिलहाल वहां किसी तरह की कोई हलचल नहीं दिखी है।