अवैध उत्खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, निगरानी के लिये जल्द तैनात होगा पैरामिलिट्री फोर्स, एमपी, यूपी और राजस्थान को लगाई फटकार

मुरैना. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चम्बल नदी में अवैध उत्खनन का लेकर सख्त रूख अपनाते हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और यूपी की सरकारों को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर राज्य सरकारें अवैध उत्खनन रोकने में असमर्थ है तो अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की जायेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि चम्बल अभ्यारण्य इलाके में जारी अवैध उत्खनन न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि यह पर्यावरण और जैव विविधता के लिये गंभीर खतरा बताया है। सुनवाई के बीच हाईकोर्ट मीडिया रिपोर्ट का भी उल्लेख किया है। जिसमें खनन के जमीनी हालत खुलासा किया गया है।
GPS  और CCTV कैमरे से होगी सख्त निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों सरकारों को निर्देश दिये है कि अवैध उत्खनन के रास्तों और नदी के संवेदनशील इलाकों में हाई-रिजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाये जायें और साथ ही उत्खनन में उपयोग होने वाले सभी वाहनों और मशीनों में जीपीएस डिवाइस आवश्यक रूप से लगाये जायें। ताकि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और वन विभाग को मिलकर 24 घंटे संयुक्त गश्त करने के निर्देश दिये है। अवैध उत्खनन में लिप्त पाये जाने वाले वाहनों को तत्काल जब्त कर सख्त कानूनी कार्यवाही करने के लिये कहा गया है। इसमें अवैध गतिविधियों पर तत्काल लगाम लगाने का प्रयास किया जायेगा।
क्यों अहम है यह फैसला
चंबल क्षेत्र देश के सबसे संवेदनशील इकोसिस्टम में से एक है, जहां घड़ियाल, डॉल्फिन और कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। लगातार हो रहा अवैध रेत खनन नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ रहा है, किनारों का कटाव बढ़ा रहा है और वन्यजीवों के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती न सिर्फ कानून व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम भी माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी स्तर पर अधिकारी लापरवाही करते पाए गए, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होगी और जवाबदेही से बचने का मौका नहीं मिलेगा।