परिषद की अभियाचित बैठक-जुगाड़ से बैठे हैं बड़े पदों पर छोटे कर्मचारी, निगमायुक्त बोले जांच करायेंगे

ग्वालियर. नगरनिगम में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सोमवार को परिषद की बैठक में हंगामा रहा। पार्षदों ने निर्माण कार्यो में हो रही गड़बडि़यों से लेकर जुगाड़ से पद लेकर बैठे कर्मचारियों पर खुलकर आरोप लगाये। पार्षदों का कहना था कि निर्माण कार्यो की जानकारी संबंधित वार्ड के पार्षदों तक को नहीं दी जाती है। यदि कोई पार्षद किसी निर्माण कार्य की शिकायत लैटरहैड पर लिखकर करता हैं तो अधिकारी उसे नजरंदाज कर देते हैं।
शुरूआत में पार्षद अनिल सांखला ने प्रभार पर बड़े पद लेकर बैठे कर्मचारियों की सूची दिखाते हुए कहा है कि निगम में गधे से घोड़ों का काम कराया जा रहा है और घोड़े गधे का काम कर रहे हैं। पीएचई में बिल बांटने वाले उपयंत्री बन बैठे हैं और उपयंत्रियों को उपायुक्त की जिम्मेदारी दी गयी है। भृत्य से संपत्ति कर की वसूली कराई जा रही है। मोहित जाट ने सभापति को संबोधित करते हुए कहा कि जिन अधिकारियों के खिलाफ सुबूत हैं उनके खिलाफ कार्यवाही करने का प्रस्ताव सदन से पास होना चाहिये। जितेन्द्र मुदगल का कहना था कि कुछ सफाई कर्मियों को कम्प्यूटर ऑपरेटर बनाकर जनमित्र केन्द्रों पर बैठा दिया गया है। जबकि वार्डो में सफाई कर्मियों को कमी है। महेन्द्र आर्य का कहना था कि तय संख्या से ज्यादा सफाई कर्मियों को दरोगा या सहायक दरोगा बना दिया गया है। अब यह सफाई का काम नहीं करते हैं। बृजेश श्रीवास ने कहा है कि जो प्रभार के पदों पर बैठे हैं। उन्हें मूल पदों पर लाया जाये। विधायक प्रतिनिधि कृष्णराव दीक्षित ने कहा है कि सेटअप के अनुसार हमारे पद नहीं भरे गये हैं। हमारे पास कार्यपालन यंत्री और अधीक्षण यंत्री जैसे अधिकारी नहीं हैं। निर्माण कार्यो की तमाम फाइलों पर इसी पद के हस्ताक्षर होते हैं। ऐसे में यदि प्रभार न दिये जाये तो कई काम रूक जायेंगे। बैठक में पार्षदों के पत्रों के जबाव न मिलने व अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने पर सभापति ने निर्देश दिये हैं कि निगमायुक्त इसकी व्यवस्था बनाये । बैठक 17 मई की दोपहर 3 बजे तक के लिये स्थिगित की गयी है।
जांच करायेंगे
प्रभार मे मामले पर बहस पूरी होने के बाद निगमायुक्त हर्षसिंह बोले ऐसी सूची मिली है। जिसमें कुछ कर्मचारी अपने मूल पद से वरिष्ठ प्रभार परद बैठे हैं। उनका परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही करेंगे। सभापति ने आयुक्त को निर्देशित किया कि वह सदन की भावना और शासन के नियमों के अनुसार कार्यवाही करें।