Goa Elections 2022: पणजी में उत्पल पर्रिकर का 5 बार के विधायक से है चुनावी मुकाबला

यूपी (दूसरे चरण) के साथ देश के सबसे छोटे राज्य गोवा (Goa Assembly Election) में भी सोमवार 14 फरवरी को वोटिंग हो रही है. बाकी जगहों के अलावा यहां की पणजी (Panaji) सीट पर भी सबकी निगाहें हैं, जहां से बीजेपी के दिग्गज नेता रहे मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर (Utpal Parrikar) चुनावी मैदान में हैं. बीजेपी ने उत्पल पर दांव लगाने के बजाय मौजूदा विधायक अतानासियो मोनसेरेट (Atanasio Monserrate) को तवज्जो दी. इससे खफा उत्पल निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर सियासी जंग में उतर गए. लेकिन पहली बार चुनाव लड़ रहे उत्पल के लिए ये लड़ाई आसान नहीं है. अमेरिका रिटर्न इंजीनियर के लिए यह चुनाव एक लिटमस टेस्ट की तरह है.

उत्पल के पिता मनोहर पर्रिकर चार बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे. केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री का दायित्व भी संभाला. मनोहर पर्रिकर की छवि एक साफ सुथरे नेता के तौर पर रही है. 2019 में उनकी मृत्यु के बाद उत्पल पिता की सियासी विरासत को संभालने में जुट गए. इसी के तहत उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में उतरने का फैसला किया. लेकिन बीजेपी ने उन्हें पणजी से टिकट नहीं दिया. भाजपा ने उन्हें पणजी छोड़कर बाकी तीन जगहों में से किसी से भी चुनाव लड़ने की पेशकश की, लेकिन उत्पल तैयार नहीं हुए. उनका कहना था कि 2019 में पिता की मृत्यु के बाद वह पंसदीदा उम्मीदवार थे, लेकिन स्थानीय राजनीति के कारण उन्हें टिकट नहीं दिया गया.

बीजेपी ने उत्पल के मुकाबले जिन अतानासियो बाबुश मोनसेरेट को तवज्जो दी है, वह पांच बार के विधायक हैं. दो बार युनाइटेड गोवंस डेमोक्रेटिक पार्टी (UGDP) और तीन बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं. अतनासियो का बेटा रोहित सिटी मेयर है. उनकी पत्नी जेनिफर भी विधायक हैं और राज्य सरकार में राजस्व मंत्री हैं. मोनसेरेट 2002 से राजनीति में हैं. मनोहर पर्रिकर के विधायक रहते मोनसेरेट पणजी की सियासत से दूर रहे. इसके बावजूद इलाके में उनका अच्छा जनाधार माना जाता है. 2017 के चुनाव आते आते पर्रिकर केंद्र में चले गए तब मोनसेरेट ने पणजी से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए. पर्रिकर की मौत के बाद 2019 के उपचुनाव में मोनसेरेट जीत हासिल करने में कामयाब रहे. मोनसेरेट रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी बिजनेस से भी जुड़े हैं. उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं.

उत्पल पर्रिकर अतानासियो मोनसेरेट को दागी बताकर निशाना साधते रहे हैं लेकिन बीजेपी के सपोर्ट से वह मजबूत स्थिति में दिखाई देते हैं. अप्रैल 2021 में हुए पणजी के निकाय चुनावों में भी उन्होंने अपना दम दिखाया था. 25 से 30 वॉर्ड्स में उनके पैनल के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्पल को गौड़ सारस्वत ब्राह्मण समुदाय का समर्थन मिलने की उम्मीद है, जो उनके पिता का सहयोग करते रहे हैं. उत्पल के पक्ष में शैलेंद्र वेलिंगकर भी जुटे हैं, जिन्होंने शिवसेना प्रत्याशी के तौर पर अपना पर्चा वापस ले लिया था. शैलेंद्र गोवा में आरएसएस के पूर्व अध्यक्ष सुभाष वेलिंगकर के बेटे हैं.

गोवा में इस बार 301 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. सत्तारूढ़ भाजपा के लिए मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद यहां पहला विधानसभा चुनाव है. 2017 में भाजपा ने केवल 13 सीटें जीतने के बावजूद क्षेत्रीय सहयोगियों और निर्दलीय उम्मीदवारों की मदद लेकर सरकार बनाई थी.