कांग्रेस का Mission Uttarakhand: बेटी के लिए वोट मांगकर भावुक हुए हरीश रावत, फिर BSP को कहा 'सुपारी किलर'

हरिद्वार. 14 फरवरी को उत्तराखंड में मतदान से पहले राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार दमखम के साथ शुरू कर दिया है. इसी सिलसिले में अपनी बेटी अनपुमा रावत के लिए वोट मांगने हरिद्वार पहुंचे हरीश रावत ने एक तरफ कांग्रेस में प्रत्याशियों की घोषणा के बाद से चल रही नाराज़गी को लेकर कहा कि ‘सबको अपने ग़म तो पीने ही पड़ेंगे’, वहीं उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी को लेकर कहा कि बसपा ‘सुपारी किलर’ के तौर पर चुनाव मैदान में उतर रही है. हरिद्वार में कांग्रेस समर्थकों से बातचीत के दौरान एक क्षण ऐसा भी आया, जब हरीश रावत भावुक हुए और अनुपमा की आंखों से आंसू छलकने लगे.

वास्तव में, उत्तराखंड की आबादी में 14 फीसदी मुस्लिम हैं, जिनमें से सबसे ज़्यादा आबादी हरिद्वार ज़िले में ही है. यहां बहुजन समाज पार्टी ने एक मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिया है, जिसे कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है. इस बारे में हरीश रावत का बयान समाचार एजेंसी एएनआई ने ट्वीट किया, ‘हमारे विषय में एक पार्टी सुपारी किलर का काम कर रही है. पिछली बार भी कांग्रेस को ध्यान में रखकर उम्मीदवार उतारा था, इस बार भी उम्मीदवार इसलिए बदला जिससे भाजपा प्रत्याशी का जीतना आसान हो. BSP सोचे की BJP को हराना लक्ष्य है या कांग्रेस को.’

भावुक हुए हरदा तो अनुपमा भी रोईं

पिछले चुनाव में हरिद्वार ग्रामीण सीट पर मुस्लिमों के वोट बंट जाने के कारण चुनाव हारे हरीश रावत इस बार इस सीट से अपनी बेटी अनुपमा के लिए वोट मांगने पहुंचे, तो उनका दर्द छलक पड़ा. उन्होंने कहा, ‘जिस दिन मेरी बेटी आपकी सेवा से इनकार करेगी, आदर्श मूल्यों के लिए लड़ने से इनकार करेगी, तो मैं अपनी बेटी को त्याग दूंगा. अगर मैंने इंसानों की सेवा की है, तो हिंदू हों या मुसलमान, सभी मेरी बेटी को जिताएं.’

‘जो नाराज़ हैं, उन्हें हम खुश कर लेंगे’

कांग्रेस में टिकट बंटवारे के बाद कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है. हरिद्वार की ज्वालापुर विधानसभा सीट पर लंबे समय से टिकट की मांग कर रहे विशाल राठौर ने टिकट न मिलने पर नाराज़ होकर भाजपा जॉइन कर ली. कांग्रेस में अनुसूचित विभाग के उपाध्यक्ष रहे राठौर का आरोप है कि रावत ने टिकट बंटवारे में मनमानी की. प्रतिक्रिया देते हुए हरीश रावत ने कहा कि रूठों को मना लिया जाएगा, लेकिन यह वक्त एकजुट होकर कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने का है. अपने गम भुलाकर साथ लड़ने का है.