उमेश रेड्डी: बलात्कारी, हत्यारा, जेल तोड़ने में माहिर, HC ने बरकरार रखी सजा-ए-मौत
बेंगलुरु. जेल तोड़कर भागने में एक्सपर्ट और देश के अलग-अलग हिस्सों में कई महिलाओं के साथ बलात्कार और लूट कर उनकी हत्या करने वाले उमेश रेड्डी (Umesh Reddy) को मौत की सजा मिलना लगभग तय है. बुधवार को कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने रेड्डी की फांसी का रास्ता साफ कर दिया है. बेंच ने दोषी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने वाली अपील को भी खारिज कर दिया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) इससे पहले ही दोषी की दया याचिका खारिज कर चुके हैं.
उमेश रेड्डी ने कथित रूप से देश के अलग-अलग हिस्सों में 20 से ज्यादा महिलाओं के साथ बलात्कार, लूट और हत्या की थी. ज्यादातर पीड़ित कर्नाटक की थी, लेकिन रेड्डी ने महाराष्ट्र, गुजरात और कश्मीर में भी वारदातों को अंजाम दिया था. वह पहली बार 1997 में दुष्कर्म और हत्या के आरोप में गिरफ्तार हुआ था. न्यायिक हिरासत के दौरान रेड्डी बेल्लारी हिंडाल्गा जेल से भागने में सफल हो गया था.
जेल से भागने में माहिर
खास बात यह है कि 1998 में चित्रदुर्ग में एक विधवा के साथ बलात्कार और हत्या का मामला सामने आने तक पुलिस उसका पता नहीं लगा सकी थी. हालांकि, इस गिरफ्तार के बाद भी वह पुलिस हिरासत से भाग गया था. जेल तोड़ने में माहिर कहा जा रहा रेड्डी तीन बार कैद से भागा था. बेल्लारी हिंडाल्गा जेल कर्नाटक का सबसे बड़ा और देश के सुरक्षित जेलों में से एक है. राज्य के लगभग सभी कुख्यात अपराधियों को इसी जेल में रखा जाता है. इतिहास में रेड्डी के अलावा यहां से किसी भी कैदी के भागने की खबर नहीं है.
पीन्य में तब पुलिस इंस्पेक्टर रहे पुलिस उपायुक्त एसके उमेश ने न्यूज18 को बताया, ‘वह सेक्स के लिए पागल और एक मनोरोगी है. मैं मामले में जांच अधिकारी था. मेरी टीम और मैंने सबूत इकट्ठे और कोर्ट के सामने उन्हें पेश करना सुनिश्चित किया था. कई मामलों में अपराधी केवल सबूतों और गवाहों के अभाव में न्यायपालिका से बच जाते हैं. अब मैं बहुत खुश हूं. सत्र न्यायालय ने मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन उसने दया याचिका की. राष्ट्रपति और हाईकोर्ट ने भी दया याचिका पर ध्यान नहीं दिया.’
उन्होंने कहा, ‘उमेश रेड्डी जैसे मनोरोगी समाज में जहरीले होते हैं और वे कई अपराधियों को प्रोत्साहित करते हैं. उसका जीवन और कोर्ट का फैसला दूसरे अपराधियों के लिए सबक बनेगा.’ पुलिस पूछताछ के दौरान रेड्डी ने 18 बलात्कार और हत्याओं की बात स्वीकारी थी. इनमें से पुलिस 11 को अदालत में साबित करने में सफल रही. अधिकारियों को शक है कि वह बलात्कार, हत्या और लूट के 20 से ज्यादा मामलों में शामिल है.
रात में करता था वारदात
उमेश रेड्डी देशभर में घूमता था. वह कभी एक जगह पर एक साल से ज्यादा नहीं रहा. वह उन महिलाओं को निशाना बनाता था, जो घर पर अकेली होती थी. रेड्डी रात में घर में घुसकर महिलाओं के साथ बलात्कार, लूट और हत्या करता था. जांच में शामिल रहे पुलिसकर्मी ने बताया कि वह मनोरोगी था और महिलाओं को मारने में उसे मजा आता था.
रेड्डी ने नवंबर 1996 में चित्रदुर्ग की KEB कॉलोनी में एक महिला के साथ रेप और उसकी हत्या की. इसी साल उसने एक युवती के साथ बलात्कार की कोशिश की. जुलाई 1997 में वह गिरफ्तार हुआ, लेकिन 24 घंटों के भीतर भाग निकला. इसके बाद उसे दोबारा गिरफ्तार कर बल्लारी जेल भेजा गया, जहां से वह मार्च 1997 में फरार हो गया. उसे फिर गिरफ्तार किया गया और 1998 में तीसरी बार कैद से भाग गया. उसने हुबली, देवानागरी और पुणे में तीन युवतियों के साथ दुष्कर्म किया.
उसने कश्मीर में CRPF अधिकारी की बेटी के साथ बलात्कार किया और फिर हत्या कर दी. 2002 में पीन्य पुलिस की सीमा में उसके खिलाफ बलातार्कार और हत्या का मामला दर्ज हुआ औ वह एक सैलून से गिरफ्तार हो गया था. हालांकि, इस बार वह भागने में सफल नहीं हो सका.