Rajasthan Politics : जोधपुर जिले की बागडोर जाटों के हाथ, बद्रीराम जाखड़ पर भारी पड़ीं दिव्या मदेरणा
जोधपुर. जोधपुर जिले (Jodhpur district) में गांवों की सरकार में जाटों ने अपना दबदबा बना लिया है. जिला परिषद (District council) के 37 में से जो 16 सदस्य जीते हैं, वे जाट हैं. राजपूत और विश्नोई (Jaat, Rajpoot and vishnoi) पांच-पांच ही हैं. जिला प्रमुख की कुर्सी जाट नेता के पास लौट आई है. वैसे तो यह कुर्सी इस बार सामान्य महिला के लिए आरक्षित थी, लेकिन मदेरणा परिवार (Maderana family) इस पर फिर से काबिज हो गया.
राजपूत व विश्नोई समाज ने भी ताकत झोंकी तो वह दूसरे व तीसरे नंबर पर रही. परंतु यह सिर्फ जातिगत दबदबे का चुनाव नहीं था. एक ही जाति के दो-दो ध्रुव आपस में टकराए थे. इसमें शेरगढ़ के पूर्व विधायक बाबूसिंह राठौड़ ने अपना वजूद बचा लिया.
लीला और मुन्नी की टक्कर में लीला अव्वल
केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत के बांटे भाजपाई टिकटों को कांग्रेस प्रत्याशियों ने हरा दिया. उधर जाटों में ओसियां विधायक दिव्या मदेरणा व पाली के पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ के बीच जबर्दस्त टक्कर रही. लीला मदेरणा ने अपने दम पर जाखड़ की बेटी मुन्नीदेवी गोदारा को फिर से जिला प्रमुख नहीं बनने दिया.
कांग्रेस ने 2004 के परिणाम को दोहराने नहीं दिया
कांग्रेस ने इस बार 2004 को दोहराने नहीं दिया. भाजपा बरसों तक जोधपुर के ग्रामीण क्षेत्र में कांग्रेस का गढ़ नहीं ढहा पाई थी. 2004 के जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस नेताओं के आपसी झगड़े का लाभ उठाकर भाजपा पहली बार अपना जिला प्रमुख बनवाने में कामयाब रही. इस चुनाव में कांग्रेस को वर्तमान के समान ही बहुमत मिला था. कांग्रेस ने लीला मदेरणा की दावेदारी को दरकिनार कर बद्रीराम जाखड़ की बेटी मुन्नीदेवी को प्रत्याशी बना दिया. यह बात मदेरणा समर्थकों को नागवार गुजरी और उसके तीन समर्थकों ने क्रास वोटिंग कर दी. अल्पमत में होते हुए भी भाजपा की अमिता चौधरी जिला प्रमुख पद पर चुनाव जीत गई.
विश्नोई समाज तीसरी ताकत बनकर उभरा
जोधपुर के ग्रामीण क्षेत्र में जाट-राजपूतों के बाद तीसरी प्रमुख जाति विश्नोई का वर्चस्व है. उसने दोनों के विवाद में पड़ने की बजाय ताकतवर को साथ देने में समझदारी दिखाई. लीला को जिला प्रमुख बनाकर दिवंगत रामसिंह विश्नोई के पोते विक्रमसिंह विश्नोई को उप जिला प्रमुख बना दिया. ऐसे ही लोहावट विधायक किशनाराम ने लोहावट और बापिणी में कांग्रेस के प्रधान बनाकर अपनी सीट फिर से सुरक्षित करने का संदेश दे दिया. उप जिला प्रमुख समेत 5 सदस्य और 2 प्रधान बनाकर विश्नोई भी अपना राजनीतिक प्रभाव कायम रखने में कामयाब रहे.