मुरार थाने में दुष्कर्म की पीडि़ता को प्रताडित करने के मामले 5 पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर, डीई के आदेश पर स्टे
ग्वालियर. मुरार थाने मंे दुष्कर्म से पीडि़त को प्रताडि़त करने और आरोपी के दादा के कहने पर मारपीट कर बयान बदलने का दबाव डालने के मामले में एकलपीठ ने तत्कालीन मुरार टीआई अजय पवार को एक एसआई कीर्ति उपाध्याय पर एफआईआर दर्ज करने और इनके साथ एएसपी, सीएसपी मुरार रामनरेश पचौरी व टीआई सिरोल प्रीति भार्गव को ग्वालियर अंचल से बाहर कर विभागीय जांच (डीई) कराने के आदेश दिये थे। मंगलवार को हाईकोर्ट की युगल पीठ ने एफआईआर और विभागीय जांच (डीई) के आदेश पर आंशिक रोक लगा दी है। पर पांचों पुलिस कर्मियों को ग्वालियर अंचल से बाहर जाना होगा और साथ ही इस मामले में अब व्हीसी की जगह भौतिक सुनवाई के लिये कहा है।
मध्य प्रदेश शासन व मुरार थाना के तत्कालीन TI अजय पवार ने 23 जून को दिए एकल पीठ आदेश के खिलाफ रिट अपील दायर की थी। दोनों अपीलों को एक साथ सुना गया था। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी ने तर्क दिया कि रिट पिटीशन में सीधे FIR के आदेश नहीं दिए जा सकते हैं। जिन लोगों के खिलाफ FIR के आदेश दिए गए हैं, उन्हें सुना ही नहीं गया। कोर्ट ने सीधे-सीधे पुलिस अधिकारियों को दोषी मानते हुए आदेश दिया है। इस तरह के आदेश से न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं हो रहा है। इसलिए आदेश पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था। मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की युगल पीठ ने विभागीय जांच व FIR के आदेश पर आंशिक रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने यह दिए थे निर्देश
CSP आरएन पचौरी ने आरोपियों की मदद की, कोर्ट को गलत जानकारी देकर गुमराह किया, इसलिए भूमिका की जांच हो। अंचल से बाहर ट्रांसफर किया जाए मुरार थाने से मामला सिरोल भेजा गया। यहां जांच सिरोल थाना प्रभारी प्रीति भार्गव कर रही थीं। पांच महीने तक कुछ नहीं किया। भूमिका की जांच हो
मुरार थाना TI अजय पवार व सब इंस्पेक्टर कीर्ति उपाध्याय ने नाबालिग को अवैध रूप से थाने में बिठाए रखा। नाबालिग के वीडियो बनाकर और कुछ अहम CCTV वाट्सएप पर शेयर भी किए। इन दोनों अफसरों पर मामला दर्ज किया जाए। जिस पर अब स्टे मिल गया है।
हाई कोर्ट ने पुलिस अफसरों पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया। यह राशि पीड़िता को देने के लिए कहा।
कोर्ट ने थानों में जितने भी CCTV कैमरे लगे हैं, वह 24 घंटे चालू रखे जाएं। भविष्य में ये कैमरे बंद नहीं रहे। कंट्रोल रूम से कैमरे कन्ट्रोल हों।
कोर्ट ने कहा कि अक्सर देखने को मिलता है कि थाने के CCTV बंद होने की रिपोर्ट आती है। इस घटना के समय भी कैमरे बंद थे। DGP मध्य प्रदेश इसका पालन करवाएं।
CBI मामले की जांच करे, CBI गंगा सिंह व पुलिस अफसरों के फोन कॉल्स की जांच करे।
पीड़िता व उसके पिता के बयानों की तीन वीडियो क्लिप पेश की थी। इस क्लीपिंग को बंद लिफाफे में रखने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस अफसरों की भूमिका की विभागीय जांच के आदेश दिए थे, जिस पर अब आंशिक रोक लगा दी है।फसरों की भूमिका की विभागीय जांच के आदेश दिए थेए जिस पर अब आंशिक रोक लगा दी है।