ग्रामीण बोले- 21 मर गए, पुलिस ने शराब पकड़ने के बजाए छिपा दी; अफसर ने पूछा- कहां है बताओ तो ग्रामीणों ने लाखों की शराब पकड़वा दी
जहरीली शराब से 21 लोगों की मौत के 60 घंटे बाद भी बवाल थमा नहीं है। बुधवार की सुबह कलेक्टर अनुराग वर्मा और एसपी अनुराग सुजानियां को हटा दिया। नए कलेक्टर के रूप में बक्की कार्तिकेयन और एसपी के रूप में सुनील कुमार पाण्डेय को पदस्थ किया गया है। जौरा के एसडीओपी सुजीत भदौरिया को भी सस्पेंड कर दिया गया है। बागचीनी थाने के पूरे स्टाफ को भी लाइन हाजिर कर दिया। मालूम हो कि एक दिन पहले आबकारी अधिकारी, बागचीनी थाना प्रभारी और बीट प्रभारी सस्पेंड किए गए थे।
ग्रामीणों का आरोप: अवैध शराब का कारोबार फलफूल रहा था, पुलिस को सब-कुछ पता था
जहरीली शराब से 21 लोगों की मौत के बाद पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करना तो दूर अवैध शराब तक नहीं पकड़ सकी। बुधवार को हुई 5 मौतों के बाद मुरैना-जौरा रोड पर शव रखकर चक्काजाम कर रहे ग्रामीणों ने पुलिस पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि आपके संरक्षण में ही अवैध शराब का कारोबार फलफूल रहा था। पुलिस को सब-कुछ पता था। हमारे 21 लोग मर चुके हैं।
अवैध शराब बनाने के मामले में जिन 7 लोगों पर एफआईआर हुई है, उनमें से 2 तो बीमार हो गए, इसलिए पुलिस उन्हें गिरफ्तार करना बता रही है, शेष 5 लोगों तक पुलिस पहुंच भी नहीं सकी। इतना ही नहीं, पुलिस ने रात में दुकानों में भरी अवैध शराब को बाहर निकलवाकर खेतों में छिपा दिया। ग्रामीणों के इस आरोप पर पुलिस अफसरों ने कहा कि तुम्हें पता है तो बताओ कहां छिपा रखी है शराब।
इस पर भीड़ में मौजूद नरेश पुत्र रामरतन किरार नामक युवक खड़ा हुआ और उसने भी पुलिस अफसरों को चैलेंज करते हुए कहा कि आओ चलो मैं दिखाता हूं, कहां अवैध शराब छिपाकर रखी है। इसके बाद आगे-आगे युवक व ग्रामीण, पीछे-पीछे एसडीओपी कैलारस शशिभूषण सिंह व अन्य पुलिस जवान। युवक नरेश किरार सीधा चक्काजाम स्थल से पुलिस फोर्स को 2 किमी दूर एक सरसों के खेत में ले गया।
यहां एक थैले में अवैध शराब छिपी रखी थी। इसके बाद उत्साहित ग्रामीणों ने नजदीक ही खुले मैदान में स्थित करब के नीचे छिपाकर रखी गई, गोआ ब्रांड शराब की 30 से अधिक पेटियां, काउंटी क्लब शराब की 3 पेटियां, देशी शराब के 5 कट्टे भी पुलिस को पकड़वाए। इसके बाद एक तीसरे खेत में रखी अवैध देशी शराब तथा एक अन्य खेत में रखी 500 से 600 लीटर ओपी तथा शराब की बोतल पैक करने वाली मशीन, खाली ढक्कन, वारदाना भी ग्रामीणों ने ही पकड़वाया।
छैरा में अवैध शराब बनाने और सप्लाई करने के नेटवर्क को पुलिस व आबकारी विभाग का संरक्षण था, यह बात तब साफ हो गई जब 21 मौतों के बाद भी पुलिस फोर्स, आबकारी विभाग अवैध शराब नहीं पकड़ सका। अपनों की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने 4 अलग-अलग जगहों से 5 लाख से अधिक की अवैध देशी, अंग्रेजी शराब, खाली वारदाना, ढक्कन, शराब की बोतल पैक करने वाली मशीनें बरामद करा दी।
इससे एक बात साफ है कि छैरा गांव अवैध शराब बनाकर, पैकिंग करने, उसकी सप्लाई करने का जिले में सबसे बड़ा केंद्र है। ग्रामीणों का तो यहां तक कहना था कि अगर पूरे गांव की घेराबंदी कराकर हर खेत, हर घर की सर्चिंग कराई जाए तो 8 से 10 ट्रक अवैध शराब मिलेगी।
डॉक्टर साहब मेरे लाल को बचा लो, 4 छोटे बच्चे हैं, नि:शब्द थे डॉक्टर क्योंकि युवक की हो गई थी मौत
हड़वांसी में रहने वाले दीपक (34) पुत्र रामहेत शर्मा ने भी जहरीली शराब का सेवन किया था। मंगलवार की रात उसे उल्टियां होने लगीं, सुबह जब मुंह से झाग निकला तो वृद्ध मां प्रेमादेवी उसे एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाई, उनके साथ ननद यानि युवक की बुआ भूदेवी भी थी।
आईसीयू में पहुंचने पर डॉ. योगेश तिवारी ने चेकअप किया तो युवक का ब्रेन डैड हो चुका था। बेटे की हालत देख मां तो पत्थर की तरह जड़ हो गई। बुआ ड्यूटी डॉक्टर के सामने गिड़गिड़ाते हुए बोली-डॉक्टर इसके दो छोटी बेटियां, दो छोटे बच्चे हैं, पिता भी नहीं हैं, इसे बचा लो। लेकिन डॉक्टर भी नर्वस थे क्योंकि बहुत देर हो चुकी थी। युवक दीपक की मौत हो चुकी थी।
जवान भतीजे की मौत पर फेरा करने गई महिला, सदमे में तस्वीर के सामने ही दम तोड़ दिया
जहरीली शराब पीने से मंगलवार को बिलैयापुरा में रहने वाली अमरसिंह पुत्र बुद्धाराम जाटव की मौत हो गई थी। बुधवार को अमरसिंह की बुआ शीला पत्नी रामवीर जाटव निवासी उत्तमपुरा बिलैयापुरा में फेरा करने गई। रोती-बिलखती और दहाड़ मारती शीला जैसे ही बिलैयापुरा में अपने भतीजे के घर पहुंची, वहां दर्द व चीख-पुकार का मंजर देखकर वह सदमे में बेहोश हो गई।
तत्काल उसे बिलैयापुरा से एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां डॉक्टरों ने शीला को मृत घोषित कर दिया। यहां बता दें कि बिलैयापुरा में रहने वाले विकास (22) पुत्र कोकसिंह अर्गल बिलैयापुरा की भी बुधवार को मौत हो गई। इस तरह इस गांव में अभी तक 2 मौत हो चुकी है।
ग्रामीणों ने चार जगह पकड़वाई अवैध शराब, आबकारी अफसर बोले-सिर्फ एक जगह मिली
ग्रामीणों ने 4 जगह अवैध शराब के जखीरा पुलिस को पकड़वाया। लेकिन आबकारी विभाग के पास सिर्फ खुले मैदान में करब से नीचे बरामद 1.75 लाख रुपए कीमत की अवैध शराब की ही जानकारी थी। जबकि इससे पहले व बाद में पुलिस ने एक खेत तथा दो खेत-खलिहानों, कुल 4 जगह से 4 लाख की अवैध शराब, खाली वारदाना तथा पैकिंग करने वाली मशीनें बरामद की थीं। जाहिर है कि आबकारी अधिकारी पूरे मामले को छिपाने में जुटे रहे।
मानपुर में मौत का तांडव, अब तक 12 मौत, 15 मुरैना-ग्वालियर के अस्पताल में भर्ती:
छैरा में बनने वाली जहरीली शराब ने सबसे अधिक तांडव मानपुर गांव में मचाया है। मानपुर गांव में अभी तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 11 की मौत सोमवार-मंगलवार तथा एक की मौत बुधवार को हुई। वहीं इसी गांव के 15 लोग अभी भी मुरैना जिला अस्पताल व जेएएच ग्वालियर में जिंदगी-मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। मंगलवार को भी मानपुर गांव की शायद ही ऐसी कोई गली हो, जहां दरवाजे पर शव न रखा हो।
जिला अस्पताल में 10 लोग भर्ती, 4 दिन पहले पी शराब, अभी तक आ रही उल्टियां
जिला अस्पताल में 10 से अधिक मरीज इलाज के लिए भर्ती हैं जिन्होंने जहरीली शराब पी थी। इनमें से आधा दर्जन लोग ऐसे हैं, जिन्होंने 3 से 4 दिन पहले तो किसी ने एक-एक घूंट शराब पी थी। लेकिन शराब इतनी जहरीली है कि एक-एक घूंट पीने वाले कल्लू (32) पुत्र बाबूलाल जाटव, कोकसिंह (26) पुत्र भरोषी जाटव, बृजेंद्र (45) पुत्र मंटू जाटव ने दैनिक भास्कर को बताया कि हमें आज भी उड़ान (दिमाग चकराने) की शिकायत है।
अमला कम खतरा ज्यादा इसलिए फील्ड में नहीं जाता अमला, शराब में इंडस्ट्रियल स्प्रिट का उपयोग
ग्वालियर. जहरीली शराब से 21 मौंतों पर प्रदेश भर में हड़कंप मचा हुआ है। लेकिन मुरैना आबकारी अमले की कमी और अवैध शराब माफिया को संरक्षण इन 21 मौतों की असली वजह है।
आबकारी के लिए मुरैना मलाईदार जिला नहीं है इसलिए कोई भी अफसर यहां तैनाती नहीं चाहता और राजनीतिक सिफारिशों से इंदौर, धार जैसे जिलों में तैनाती कराते हैं। मुरैना में आबकारी अधिकारियों के आधे से ज्यादा पद लंबे समय से रिक्त हैं। मुरैना जिले में सहायक जिला आबकारी अधिकारी के 4 पद स्वीकृत हैं, लेकिन दो पद लंबे समय से रिक्त हैं।
अंतरराज्यीय सीमा फिर भी अमले की कमीं
मुरैना जिला राजस्थान के धौलपुर की सीमा से जुड़ा है और राजस्थान से शराब तस्करी भी होती है। हरियाणा की शराब भी मुरैना में तस्करी कर लाई जाती है। यह स्थिति किसी से छिपी नहीं है लेकिन इसके बाद भी अफसर यहां अमला तैनात नहीं कर पाते क्योंकि राजनीतिक छत्रछाया वाला अफसर व कर्मचारी अपनी पदस्थापना बड़े शहरों में करा लेते हैं।
सहायक आबकारी आयुक्त जगदीश राठी की पदस्थापना के दौरान लगभग तीन वर्ष पूर्व आबकारी दल व पुलिस की टीम ने छेरा गांव में अवैध शराब के अड्डे पर दबिश दी थी। इस दौरान शराब माफिया ने दल पर गोली चला दी थी।
सीएम हुए नाराज, तब 3 दिन बाद बीमारों को देखने पहुंचे कमिश्नर-आईजी
जहरीली शराब कांड में सबसे हैरत की बात यह है कि रविवार से लोगों के मरने का सिलसिला शुरू हुआ। सोमवार की शाम जिला अस्पताल में लाशों के साथ-साथ बीमार लोगों के ढेर लग गए। लेकिन सीएम के आदेश पर हटाए गए निवर्तमान कलेक्टर अनुराग वर्मा, एसपी अनुराग सुजानियां बीमार मरीजों को देखने अस्पताल तक नहीं आए।
बुधवार को जब सीएम ने इस मामले में उच्चस्तरीय कमेटी बनाकर एसपी-कलेक्टर को हटाने के आदेश दे दिए और संभागीय अफसरों पर नाराजगी जाहिर की, तब कहीं जाकर प्रभारी आयुक्त आशीष सक्सेना तथा आईजी चंबल मनोज शर्मा पहुंचे।
मौत की कहानियां: जहरीली शराब ने ले ली पिता की जान, छह-छह बेटियों को कौन पालेगा
शराब तस्कर गिर्राज के भाई को ही लग गई लत, एक साथ दो क्वार्टर पीने से दम ताेड़ दिया:
जहरीली शराब पीने से मरने वालों में एक नाम शामिल है सरनाम सिंह किरार(35)। इनका छाेटा भाई गिर्राज ही मानपुर और छैरा गांव का बड़ा शराब तस्कर है। बड़ा भाई शराब तस्कर था और घर में ही शराब बनाकर बेचता था। रविवार को वह अपने दोस्त ध्रुव के साथ टपरे से शराब बेचने वाले रामवीर राठौर से जहरीली शराब ले आया।
दो क्वार्टर पी लिए और कुछ देर बाद ही मुंह से झाग निकलने लगा। इससे पहले गांव के केदार की जहरीली शराब से मौत हुई थी। भाई की तबियत बिगड़ते ही गिर्राज भाग गया और सरनाम ने दम तोड़ दिया। सरनाम कोे 5 बेटा और एक बेटी है। उसने बड़ी बेटी की सगाई पिछले सप्ताह सोमवार को ही तय की थी।
शराब ने लीला मुखिया, 6 बेटियां कौन पालेगा
दिलीप पुत्र रामचन्द्र शाक्य(35)। परिवार वही पाल रहा था। रविवार को शराब तस्कर पप्पू पंडित से शराब खरीदी और पीकर घर पहुंचा। अस्पताल में उसकी मौत हो गई। परिवार में छह बेटियां हैं। वृद्ध माता पिता और पत्नी है। भाई अलग रहते हैं। अब परिवार के लालन-पालन के लिए कोई नहीं बचा, क्योंकि पिता की उम्र 70 वर्ष है।
बड़े भाई की मौत, उसके 6 बच्चों का क्या होगा
जितेंद्र पुत्र पातीराम जाटव(32) की मौत भी जहरीली शराब पीने से हुई। उसके छह बच्चे हैं। पांच बेटी और एक बेटा। छोटा भाई सिम्मी बीमार रहता है। पिता वृद्ध हैं। घर की पूरी जिम्मेदारी जितेंद्र पर थी।
पत्नी की बीमारी से मौत, पति की जान जहरीली शराब ने ले ली, अनाथ हो गए बच्चे
धर्मेंद्र पुत्र रामजीलाल(40)। इनकी पत्नी उर्मिला का निधन बीमारी से हो गया था। जहरीली शराब ने धर्मेंद्र की जान ले ली। अब उनके दोनों बेटे अंकित और अमित अनाथ हो गए। दोनों पढ़ाई कर रहे हैं।
पहले चाचा, देर रात भतीजे की माैत
ध्रुव पुत्र महाराज सिंह(60) निवासी मानपुर। इन्होंने सोमवार को शराब पी थी, मंगलवार को इनकी मौत हो गई। देर रात भतीजे कमल किशोर की तबियत बिगड़ी। उसे अस्पताल भिजवाया तो उसकी भी मौत हो गई। एक ही घर में दो मौत से खुशियों पर ग्रहण लग गया।
एक घर मौतें दो: तीन दिन पहले मां की मौत, जहरीली शराब ने बेटा भी छीन लिया
रामजीलाल पुत्र लालाराम राठौर(50)। इनकी मां धनकुंवर(98) की सोमवार को मौत हुई थी। रात में रामजीलाल रामवीर से शराब खरीद लाया। उसकी तबियत रात में बिगड़ी। मुरैना अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई।
बुधवार को इन मरीजों की हुई मौत
विकास (22) पुत्र कोकसिंह अर्गल, बिलैयापुरा
कालीचरण (55) पुत्र रामस्वरूप कुशवाह छिछावली
पवन (50) पुत्र गोकुलचंद्र, महाराजपुरा
रामजीलाल (45) पुत्र लालाराम राठौर, मानपुर
दीपक (38) पुत्र रामहेत शर्मा, हड़वांसी