चेतकपुरी नाला -ऑर्किड टॉवर-तोरण वाटिका के रसूख के आगे रुके अफसर, सात दिन में खुलना था नाला
ग्वालियर-शुक्र है… इस बार बारिश पर ब्रेक लगा है। वरना, शहर के बीचोंबीच बसी रानीपुरा और उसके आसपास की बस्तियों में सिर्फ जलभराव नहीं होता बल्कि बड़ी परेशानियां आ जातीं। कारण- रानीपुरा से चेतकपुरी तक आने वाले नाले (जो कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार पहले बतौर नहर दर्ज था) की जमीन पर तने ऑर्किड टॉवर के हिस्से और तोरण वाटिका, जिनकी वजह से नाले का बहाव रुक गया है।
इस बहाव के लिए नाला खोलने का बाकायदा तहसील कोर्ट ने निगम अधिकारियों को दिया। उसे भी अधिकारियों ने फाइलों में ही दफन कर दिया है। 3 जुलाई को तहसीलदार मनीष जैन ने आदेश जारी किया था कि रानीपुरा पुलिया से आने वाले नाले को सिकुड़े मार्ग से निकालने में निगम के कारण यहां की काफी बड़ी सरकारी जमीन पर कब्जा हुआ है। नगर निगम अगले 7 दिन में नाले को चेतकपुरी सड़क की तरफ (तोरण वाटिका हटाते हुए) लेकर मोटी पाइप लाइन में मिलाए और इतनी जल्दी पक्का निर्माण संभव नहीं हो तो अस्थायी रूप से कच्चे तौर पर खुदाई कर इसे शुरू कर दिया जाए।
विवादित सर्वे नंबरों की जमीन पर निर्माण
1. तोरण वाटिका: तहसीलदार ने 5 जून को दिए आदेश में स्पष्ट किया कि रानीपुरा से चेतकपुरी रोड की तरफ आने वाला नाला महलगांव के सर्वे नंबर 1211 की जमीन पर तोरण वाटिका शासकीय जमीन पर बनाई है।
2. ऑर्किड टॉवर: देवेंद्र, पारस और निकेत जैन की कंपनी ने महलगांव के सर्वे नंबर 1211, 1221, 1213, 1214, 1215, 1216 और 1217 के प्लॉट 2, 3 व 5 पर निर्माण की अनुमति ली। इनमें से सर्वे नंबर 1211, 1215, 1216 एवं 1217 की जमीन सरकारी एवं विवादित है।
3 जुलाई को दिया था आदेश
मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड में सर्वे नंबर 1211 नहर है। इस नंबर को निजी नाम पर कैसे दर्ज किया गया। 3 जुलाई को कच्चा नाला बनाने के आदेश दिए थे।” मनीष जैन, तहसीलदार
नगर निगम ने दिए संसाधन
“तहसीलदार के साथ समन्वय के लिए नगर निगम की टीम ने जेसीबी सहित आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए हैं। मौके पर तहसील न्यायालय के आदेशानुसार कार्रवाई की जा रही है।” संघ प्रिय, आयुक्त, नगर निगम