सेबी का बड़ा फैसला: एजुकेशन और रिटायरमेंट वाली 44 म्यूचुअल फंड स्कीमें बंद

अब बच्चों की पढ़ाई और रिटायरमेंट के नाम पर चलने वाली म्यूचुअल फंड योजनाएं धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी. पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने 26 फरवरी 2026 को एक बड़ा फैसला लेते हुए ‘सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीम’ कैटेगरी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है. इस कैटेगरी में वही योजनाएं आती थीं, जिन्हें खास तौर पर बच्चों की शिक्षा या रिटायरमेंट जैसे लक्ष्यों के लिए बनाया जाता था. सेबी के इस फैसले का मतलब यह है कि अब इस श्रेणी की कोई नई योजना नहीं आएगी और जो योजनाएं पहले से चल रही हैं, वे अब नए निवेश स्वीकार नहीं करेंगी. धीरे-धीरे इन योजनाओं को अन्य समान प्रकृति वाली म्यूचुअल फंड योजनाओं में मिला दिया जाएगा. इस प्रक्रिया के लिए सेबी की मंजूरी लेना जरूरी होगा. जनवरी 2026 तक इस श्रेणी में बच्चों की 15 और रिटायरमेंट की 29 योजनाएं सक्रिय थीं, जिन पर अब यह बदलाव लागू होगा.
सेबी ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को ज्यादा सरल और पारदर्शी बनाया जा सके. पिछले कुछ वर्षों में देखा गया कि कई योजनाओं का उद्देश्य और निवेश पैटर्न एक जैसा होने के बावजूद वे अलग-अलग नामों और श्रेणियों में मौजूद थीं. इससे निवेशकों को यह समझने में मुश्किल होती थी कि कौन-सी योजना वास्तव में अलग है और कौन-सी नहीं. कई बार अलग नाम होने के बावजूद योजनाओं के पोर्टफोलियो लगभग समान होते थे, जिससे निवेशकों में भ्रम पैदा होता था. सेबी का मानना है कि जब समान उद्देश्य वाली योजनाएं एक ही श्रेणी में होंगी, तो निवेशक आसानी से उनकी तुलना कर सकेंगे और बेहतर फैसला ले पाएंगे.
इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर भी सख्ती
नई व्यवस्था के तहत सेबी ने इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर भी सख्ती बढ़ाई है. अब अगर कोई एसेट मैनेजमेंट कंपनी वैल्यू फंड और कॉन्ट्रा फंड दोनों चलाती है, तो उनके पोर्टफोलियो में 50 प्रतिशत से ज्यादा समानता नहीं होनी चाहिए. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर योजना वास्तव में अलग रणनीति के साथ काम करे. इसी तरह सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स को भी अपने पोर्टफोलियो में ओवरलैप कम करना होगा. अगर तीन साल के भीतर यह ओवरलैप तय सीमा से नीचे नहीं लाया गया, तो ऐसी योजना को दूसरी योजना में मिलाना अनिवार्य होगा. साथ ही, अब म्यूचुअल फंड कंपनियों को हर महीने अपनी वेबसाइट पर पोर्टफोलियो ओवरलैप की जानकारी भी देनी होगी, जिससे निवेशकों को पूरी पारदर्शिता मिल सके.