जीवाजी यूनिवर्सिटी में कार्यपरिषद की बैठक में हुआ हंगामा, पत्रों का जवाब न मिलने पर बिफरे ईसी मेंबर
ग्वालियर. जीवाजी यूनिवर्सिटी में कार्यपरिषद की बैठक में प्राइवेट कॉलेजों को शिक्षकों की भर्ती के लिए एक महीने का समय और दिया गया है। इसके बाद प्रोफॉमो जमा करने की प्रक्रिया होगी। कॉलेजों के बचे हुए संबद्धता शुल्क को जमा करने को लेकर हुई चर्चा में यह तय किया गया। कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को लेकर पिछले दिनों लगातार आरोप लगे है और इसके बाद 6 माह में शिक्षकों की नियुक्ति शून्य मानी गई थी। इसके बाद प्राइवेट कॉलेजों में नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया चल रही अभी कई सारे कॉलेजों में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है इसलिए एक माह का मौका और दिया गया है। बैठक में एजेंडे के बिंदुओं पर चर्चा के बाद कार्यपरिषद सदस्य विवेक भदौरिया ने पत्रों के जरिए मांगी गई जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा। जानकारी न मिलने पर भदौरिया भडक गए और उन्होंने इसे गलत बताते हुए तुरंत जानकारी देने के लिए कहा। उन्होंने जो जानकारी मांगी थी उसमें अध्ययनशालाओं में कैमिकल की उपलब्धता खरीदी और अनुसंधान की जानकारी भी शामिल थी। यह जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में तमाम काम हो रहे है लेकिन छात्रों के हित के काम का ध्यान किसी को नहीं है। इसके बाद कुलपति अविनाश तिवारी चले गए तो भदौरिया अध्यक्षता करने के लिए उनकी सीट पर बैठ गए। बाद में अन्य कार्यपरिषद सदस्यों ने उन्हें समझाकर हटाया, इसके बाद कुलपति लौटे।
कैमिकल की कमी पर हुआ हंगामा
कार्यपरिषद में एजेंडे में आए बिंदुओं पर सभी सदस्यों की सहमति के बाद सदस्य विवेक भदौरिया ने उनके द्वारा पिछले दिनों में पत्र लिखकर मांगी गई जानकारी न दिए जाने को लेकर आपत्ति की और जानकारी मांगी। अध्ययनशालाओं में कैमिकल, ग्लास वेयर और अनुसंधान संबंधी जानकारी नहीं दी गई। इस पर वह भडक गए। उनका कहना था कि वह विद्यार्थियों की सुविधा के मामले उठा रहे है और उन्हें दबाया जा रहा है। इस पर कुलपति ने कहा कि आप इस तरह से नहीं बोल सकते। भदौरिया ने कहा कि हम चाय पकौडी खाने नहीं आए। इस पर दोनों के बीच गरमा-गरमी हुई और उसके बाद कुलपति कुर्सी से उठकर चले गए।
विद्यार्थियों को मिलेगी ऑनलाइन शिकायत करने की सुविधा
कार्यपरिषद में विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिकायत करने की सुविधा देने का प्रस्ताव रखा गया था। यह सुविधा एमपी ऑनलाइन के माध्यम से दी जाना है। इसमें विद्यार्थियों को मार्कशीट और दस्तावेजों में छोटे-छोटे करेक्शन और अन्य समस्याओं के लिए यूनिवर्सिटी के चक्कर नहीं लगाने होंगे। 15 दिन में यह सुविधा शुरू की जाएगी।
लॉ कॉलेजों को संबद्धता देने का प्रस्ताव पारित
बैठक मे कॉलेजों से संबद्धता शुल्क की अंतर राशि जमा कराने के मामले में कॉलेज संचालकों की ओर से आए उस पत्र को भी रखा गया जिसमें उन्होंने बढे हुए शुल्क स्थगित करने की मांग की थी। इस पर तय किया गया कि फिलहाल यह शुल्क स्थगित नहीं किया जाएगा। इसके बाद प्राइवेट कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर चर्चा हुई इसमें शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कए माह का समय और दिया गया है। बैठक में लॉ कॉलेजों को संबद्धता दिए जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया।