नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले दो बालक को अभिरक्षा में लिया
ग्वालियर थाना बिलौआ में 6 नवम्बर को नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में एक अज्ञात आरोपी सहित 5 आरोपियों के खिलाफ पुलिस की एक टीम को उक्त प्रकरण में लिप्त आरोपियों को पकड़ने हेतु लगाया गया। पुलिस टीम को 9 नवम्बर को सूचना मिली कि नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में फरार चल रहे आरोपियों में से 2 विधिविरूद्ध बालकों को ग्राम रौरा में देखा गया है।
दो संदिग्ध बालक खडे दिखे जिन्हे पुलिस टीम द्वारा अभिरक्षा में लेकर नाम पता पूछा तो उन्होने स्वयं को ग्राम रौरा का ही रहने वाला बताया। दोनों बालकों से थाना बिलौआ के प्रकरण के संबंध में पूछताछ करने पर उनके द्वारा अपने अन्य 2 साथियों के साथ मिलकर अपराध करना स्वीकार किया। 8 नवम्बर को एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है। अन्य आरोपियों की पुलिस द्वारा तलाश की जा रही है।
क्या है पूरा मामला
ग्राम रोरा ने अपनी मॉ व पिता के साथ 6 नवम्बर को थाना बिलौआ में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 31 अक्टूबर की रात्रि में लगभग 12 बजे अपने घर पर पढ़ाई कर रही थी, तभी मेरे पड़ोस में रहने वाली मेरी सहेली मेरे घर पर आई और मुझे घर के पीछे बने जंगल में ले गई कुछ देर के बाद जंगल में हमारे गांव में ही रहने वाला मेरी सहेली का दोस्त मिला, मेरी सहेली मुझे अपने दोस्त के पास छोड़कर चली गई, फिर वह लड़का मुझे जंगल में अपने अन्य 2 दोस्तों के पास ले गया उन दोनों में से मैं एक लड़के को जानती थी। फिर वहां से मेरी सहेली का दोस्त और वो अनजान लड़का मुझे एक लड़के के पास अकेला छोड़कर चले गये, उस लड़के ने जबरदस्ती मेरे साथ मारपीट कर गलत काम किया। थोडी देर बाद मेरी सहेली का दोस्त और वो अनजान लड़का वापस आ गये, उसके बाद दोनों मुझे अनजान लड़के के पास छोड़कर चले गये और कहा कि चुपचाप से इसके साथ ही रहना नहीं तो तुझे यही जान से मार देंगे। उस लड़के ने मेरे साथ मारपीट कर मेरे हाथ पैर अपनी साफी से बांधकर मुझे रात भर जंगल में बांध कर बिठाये रखा। उस अनजान लड़के के फोन पर बार-बार हमारे गांव में ही रहने वाले व्यक्ति के फोन आ रहे थे। उस व्यक्ति से वह अनजान लड़का लगातार मेरे बारे में बात कर रहा था। फिर अगले दिन उस अनजान लड़के ने मेरे हाथ पैर खोलकर मुझे जाने के लिये कहा और कहा कि अगर तूने किसी को हमारे बारे में बताया तो फिर से तुझे ऐसे ही घर से उठा लेंगे। उसके बाद मैं अपने घर पहुंचकर मैंने सारी बात अपने मम्मी पापा को बताई। मैं और मेरे घर वाले इस घटना के बाद बहुत डरे हुए थे इसलिये हम चार पांच दिन से रिपोर्ट लिखवाने के लिये नहीं आये थे।