जितना प्रकृति का संरक्षण होगा उतना ही हमारा जीवन सुखी बनेगा – श्रीविनोद शर्मा
ग्वालियर मनुष्य जितना प्रकृति के संरक्षण पर ध्यान देगा उतना ही उसका जीवन स्वस्थ और सुखी बनेगा। प्रकृति जो हमें दे रही है वह निरंतर मिलता रहे। इसके लिए उसका संरक्षण भी हम ही को करना होगा। इंडियन वाटर वर्क्स एसोसिएशन के तत्वावधान में विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को मुख्य अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यालय में एक सेमीनार का आयोजन किया गया। प्रकृति संरक्षण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सेमीनार में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी विनोद शर्मा ने यह बात कही।
प्रकृति संरक्षण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सेमीनार में भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी विनोद शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रतिदिन पौधरोपण का कार्य पिछले कई दिनों से कर रहे हैं। उनसे प्रेरणा लेकर हम सब लोगों को भी प्रकृति के संरक्षण के लिये नियमित रूप से पौधरोपण का कार्य हाथ में लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि गृहों की शांति के लिये भी वृक्ष लगाए जा सकते हैं। इसके लिये नक्षत्र वाटिकाएँ भी तैयार की जा सकती हैं। जिसमें व्यक्ति अपनी राशि के अनुसार पौधे रोपकर जीवन में शांति और समृद्धि के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण की दिशा में भी कार्य कर सकता है।
घर के आगे केला और पीछे लगाएँ बेल फिर देखें सुखद जिंदगी के खेल
विनोद शर्मा ने उदाहरण देते हुए कहा कि हम सब अपने घर के आगे केले का पेड़ और घर के पीछे बेल (बेलपत्र) फिर देखें जीवन का खेल । उन्होंने कहा अगर सभी लोग अपने घर पर केला और बेलपत्र का पेड़ लगाएँ तो घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। जीवन में बेहतर स्वास्थ्य और शांति भी प्राप्त होती है। प्रकृति के संरक्षण की दिशा में जो जहाँ है वहाँ पेड़ लगाए, पशु-पक्षियों को पानी और आहार दें और जल का जितना जरूरी है उतना ही उपयोग करें तो यही कार्य हम सबका प्रकृति के प्रति संरक्षण का कार्य होगा।
एमआईटीएस कॉलेज के प्रोफेसर एके सक्सेना ने कहा कि विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर आयोजित इस कार्यशाला में उपस्थित सभी लोग प्रकृति के संरक्षण के लिये क्या किया जाना चाहिए, इससे वाकिफ हैं। हम सबको युवाओं और बच्चों को प्रकृति संरक्षण की दिशा में कार्य करने के लिये प्रोत्साहित करने की जरूरत है। प्रकृति का संरक्षण केवल चर्चा से नहीं बल्कि हर व्यक्ति के सार्थक प्रयास से संभव है।