मथुरा-वृंदावन की अनूठी दैव झांकियां बिखेरेंगीं भगवान परशुराम चल समारोह में अपनी जादुई छटा

ग्वालियर -आगामी 30 अप्रैल को शाम 5 बजे अचलेश्वर मंदिर से महाराज बाड़े तक निकाले जाने वाले भगवान परशुराम चल समारोह में इस वर्ष विशेष रूप से मथुरा-वृंदावन से आने वाली देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां ग्वालियर वासियों को लुभायेंगीं। चल समारोह के संयोजक इंजीनियर राजेश नायक ने बताया कि मथुरा के ब्राह्मण संगठन के आमंत्रण पर चल समारोह समिति के प्रतिनिधि मथुरा-वृंदावन की परंपरागत झांकियों के दर्शन करके वापस आये और उनकी अनुशंसा पर समिति ने निर्णय लिया कि इस वर्ष ग्वालियर वासियों को इन झांकियों के रूप में एक नया अनुभव प्रदान किया जाये। राजेश नायक ने कहा कि ग्वालियर अंचल की धरती का अटूट संबंध मथुरा-वृंदावन की धर्मनगरी से आदिकाल से रहा है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण स्वयं गोहद तक अपनी गायें चराने आ जाया करते थे, इसीलिए इस कस्बे का नाम गोहद पड़ा। मथुरा-वृंदावन से आने वाली झांकियां इस ऐतिहासिक संबंधों को, और भगवान विष्णु के दोनों अवतारों भगवान कृष्ण और भगवान परशुराम को अन्य देवी-देवताओं के साथ एकाकार कर चल समारोह को ऐतिहासिक भव्यता प्रदान करेंगीं।
इस अवसर पर पंडित महेंद्र पसारिया, पंडित रामनारायण मिश्र, पंडित रवि आनंद गौड, युवा आयोजक श्रीमति अनिता रिछारिया सयोजिका, देवेंद्र दुबे, (महामंत्री सर्व ब्राह्मण) पंडित अतुल पांडे, कोषाध्यक्ष, पंडित राम पांडे, पंडित रवि भारद्वाज, पंडित महेंद्र शर्मा, पंडित ध्रुव चतुर्वेदी पंडित अमित चतुर्वेदी पंडित आशुतोष शर्मा, पंडित लोकेश चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे।