ग्वालियर का डेढ़ वर्ष से तानसेन थीम चौराहा लोकार्पण के इंतजार की राह में
ग्वालियर. शहर में वाहनों की आवाजाही और क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़े पुरानी छावनी संगीत सम्राट तानसेन की प्रतिमा पर डेढ साल से कपड़ा ढका हुआ है। डेढ़ साल पहले बने इस चौराहे पर संगीत सम्राट तानसेन की उनके वाद्य यंत्र के साथ प्रतिमा और म्यूजिकल फाउंटेन व रंगीन लाइट स्थापित की गई है। लोकार्पण के लिए VIP से समय नहीं मिलने के कारण नगर निगम इस पर लाइटिंग भी चालू नहीं कर रहा है। दूसरी तरफ इसे बनाने वाले मूर्तिकार भी इसके रखरखाव की अतिरिक्त जिम्मेदारी से परेशान है।
अटल द्वार पर बना चौराहा
इस प्रवेश द्वार से दिल्ली, मथुरा, आगरा, इंदौर, भोपाल, मुंबई आने-जाने वाले वाहन पास होते है। डेढ़ दशक पहले काउंटर मैग्नेट सिटी साडा ने यहां इंदौर के विजय नगर चौराहा की तर्ज पर अटल द्वार चौराहा की तर्ज पर अटल द्वार चौराहा बनाया था लेकिन लाइटिंग व देखभाल के अभाव में कुछ माह में यहां की स्थिति खराब होती चली गई। चौराहे को खूबसूरत बनाने के लिए चारों ओर ग्रेनाइट के पत्थर लगाए गए है लेकिन यह पत्थर भी खराब हो रहे हैं।
1.87 करोड़ से तैयार चौराहा
ग्वालियर की 7 पहचान संगीत सम्राट तानसेन की गायन मुद्राओं की मूर्तियों व म्यूजिकल फाउंटेन से सुसज्जित 1.87 करोड़ की लागत से यह चौराहा डेढ़ वर्ष पहले तैयार हो चुका है। मूर्तियों के बी में 11 फुट ऊंचाई का वटवृक्ष की स्थापना की गई है। मूर्ति के पास ही वाद्य यंत्र प्रदशित किए गए है। लोकार्पण होने पर यहां पर अलग-अलग राग के साथ लाइट प्रदशित देखने को मिलेगी। इस प्रोजेक्ट के लिए लाइट एंड साउंड इफेक्ट बाहर से मंगाया गया है। लाइट शुरू हो जाने पर यह चौराहा शहर की छवि को प्रस्तुत करता नजर आएगा।
जल्द कराया जाएगा लोकार्पण
तानसेन चौराहे का लोकार्पण कराया जाना है लेकिन बीच में आचार संहिता के चलते इस तरह के सभी काम रूक गए थे। तानसेन चौराहे जनता को समर्पित हो यह हमारी प्राथमिकता में है। जल्द ही इसकी लोकार्पण कराया जाएगा।
किशोर कन्याल, आयुक्त नगर निगम