कोरोना काल में अपने माता-पिता को खो चुके विद्यार्थियों से जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा कोई फीस नहीं ली जाएगी
ग्वालियर. कोरोना संक्रमण काल में अपने माता-पिता को खो चुके विद्यार्थियों से जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा कोई फीस नहीं ली जाएगी। यह आदेश जेयू कुलसचिव ने एसओएस के सभी विभागों को जारी कर दिए हैं। आदेश में कुलसचिव सुशील मंडेरिया ने बताया कि 1 मार्च 2021 से 30 जून 2021 के बीच कोविड से अनाथ होने वाले विद्यार्थियों द्वारा जेयू के यूजी-पीजी कोर्स में प्रवेश लेते है तो उनसे विवि द्वारा किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जाएगी। इतना ही नहीं प्रवेश शुल्क से लेकर परीक्षा शुल्क व अन्य वार्षिक शुल्क व मेस शुल्क सहित अन्य शुल्क भी माफ किया जाएगा। वहीं ऐसे विद्यार्थियों से कौशल मनी भी जमा नहीं कराई जाएगी। हालांकि विवि में अभी तक इस तरह का कोई मामला नहीं आया है। लेकिन नए सत्र 2022-23 में यह मामले आ सकते हैं। इसको लेकर जेयू के यूजी-पीजी के सभी अध्ययनशालाओं के विभागों को आदेश जारी किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण काल में अपने माता-पिता को खोने वाले छात्रों को राहत देने के लिए प्रदेश सरकार ने ऐसे सभी विद्यार्थियों को बाल कल्याण योजना के तहत लाभ दिए जाने की बात कही गई थी। उसी घोषण का पालन करते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने भी प्रदेश के सभी विवि व महाविद्यालयों को पत्र भेजते हुए कोविड से अनाथ हुए छात्र-छात्राओं से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लेने के निर्देश दिए गए थे।
उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर कोविड में अनाथ हुए विद्यार्थियों से यूजी-पीजी में में एडमिशन लेने पर किसी तरह का कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके लिए सभी विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं।
डॉ सुशील मंडेरिया कुलसचिव जेयू