ग्वालियर में अब सभापति के लिए जोड़तोड़, निर्दलीय पार्षदों पर होंगी सबकी निगाहें, निभाएंगे अहम भूमिका
ग्वालियर. महापौर और पार्षदों का परिणाम आने के बाद अब भाजपा और कांग्रेस में सभापति को लेकर जोड़तोड़ शुरू हो गई है। जहां भाजपा 34 पार्षदों के साथ बहुमत के बॉर्डर पर है। वहीं कांग्रेस का संख्या बल अभी 27 (आशा सुरेंद्र चौहान के शामिल होने और समर्थित प्रत्याशी दीपक मांझी को शामिल कर) तक पहुंचा है। ऐसे में पार्टी के नेता बहुजन समाज पार्टी के एक पार्षद और दो से तीन निर्दलीयों सहित सत्तापक्ष के पार्षदों पर भी दांव खेलने की तैयारी कर रहे हैं। ताकि अपनी पार्टी का सभापति बनाकर वे परिषद में भी वर्चस्व स्थापित कर सकें। वहीं, पार्षदों की संख्या में सबसे बड़े दल भाजपा में दो से तीन निर्दलीय और शामिल होने की अटकलें चल रही हैं। यदि ऐसा हुआ तो भाजपा परिषद के अंदर बहुमत के जादुई आंकड़े से ज्यादा सदस्य लेकर बैठेगी इस स्थिति में मेयर- इन-काउंसिल के द्वारा भेजे गए प्रत्येक प्रस्ताव पर परिषद में अड़ंगे लगते रहेंगे।
दल बदल विधेयक लागू नहीं, इसलिए पार्षदों को दल बदलने में खतरा नहीं: लोकसभा और विधानसभा की तरह नगर निगम परिषद में दलबदल विधेयक लागू नहीं है। इस कारण यहां पार्षदों को दूसरे दल का साथ देने में कोई खतरा नहीं है। चूंकि महापौर डाॅ. शोभा सिकरवार और उनके पति विधायक डॉ. सतीश सिकरवार लंबे समय तक भाजपा में ही रहे हैं। इसके साथ ही पिछली 3 बार से उनकी उपस्थिति परिषद में भी है। ऐसे में वे अपने संबंधों के आधार पर भाजपा के पार्षदों को तोड़ सकते हैं। भाजपा अपने 34 पार्षदों के अलावा बागी और निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ लेने की जोड़तोड़ कर रही है ताकि सदन में पर्याप्त बहुमत के साथ बैठ सके।